DUSU Election Union Fund: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी DUSU चुनाव हर साल कैंपस में काफी चर्चा में रहता है। इस बार भी अध्यक्ष पद को लेकर ABVP के यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। 19 सितंबर को वोटों की गिनती जारी है और अलग-अलग राउंड में बढ़त बदलती नजर आ रही है। इसी बीच DUSU के कामकाज और उसके यूनियन फंड को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।
DUSU का कितना है यूनियन फंड
DUSU का अपना एक आधिकारिक यूनियन फंड होता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसमें हर साल करीब 23 से 24 लाख रुपये जमा होते हैं। यह पैसा सीधे किसी एक पदाधिकारी को नहीं मिलता, बल्कि छात्र संघ की गतिविधियों के लिए रखा जाता है। यानी DUSU अध्यक्ष बनने का मतलब यह नहीं है कि उनके पास लाखों रुपये व्यक्तिगत तौर पर खर्च करने के लिए आ जाते हैं।
हर छात्र से लिए जाते हैं 20 रुपये
इस फंड का पैसा छात्रों से मिलने वाली फीस से आता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों और विभागों में एडमिशन के समय छात्रों से सालाना 20 रुपये DUSU फीस ली जाती है। यही रकम आगे चलकर यूनियन के केंद्रीय फंड का हिस्सा बनती है। साधारण हिसाब से देखें तो बड़ी संख्या में छात्रों से छोटी-छोटी रकम जमा होकर साल में लाखों रुपये का फंड तैयार होता है।
पैसा कहां किया जाता है खर्च
DUSU का यह फंड छात्रों से जुड़ी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें छात्र कल्याण से जुड़े काम, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। इसका मतलब यह पैसा किसी एक कार्यक्रम या किसी एक पदाधिकारी की निजी जरूरत के लिए नहीं होता। फंड का इस्तेमाल छात्र संघ से जुड़े कामों के लिए किया जाता है।
DUSU अध्यक्ष को नहीं मिलती सैलरी
DUSU अध्यक्ष का पद काफी चर्चा में रहता है, लेकिन इसे नियमित नौकरी की तरह नहीं माना जाता। अध्यक्ष को विश्वविद्यालय के कर्मचारी की तरह तय मासिक वेतन नहीं मिलता। इसी तरह यूनियन फंड भी अध्यक्ष की निजी कमाई नहीं है। इसलिए DUSU चुनाव में जीतने वाला उम्मीदवार फंड का इस्तेमाल अपनी मर्जी से निजी खर्च के लिए नहीं कर सकता। यूनियन की गतिविधियों और छात्रों से जुड़े कामों के लिए ही इसका इस्तेमाल किया जाता है।
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