E20 Petrol: चीनी की बढ़ती कीमतों ने एथेनॉल और E20 पेट्रोल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जुलाई 2026 से चीनी के दाम करीब 10 फीसदी बढ़ने के बाद अगले सीजन में गन्ने के इस्तेमाल को लेकर सरकार के स्तर पर मंथन चल रहा है। ऐसे में सवाल है कि अगर एथेनॉल के लिए गन्ने की उपलब्धता घटती है तो E20 पेट्रोल की सप्लाई कैसे बनी रहेगी? इसका सीधा जवाब मक्का और चावल से जुड़ा है।
चीनी महंगी होने से गन्ने पर क्यों बढ़ी नजर?
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे गन्ने के उत्पादन को लेकर चिंता और त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग दोनों प्रमुख वजहें हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण अगले साल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। दूसरी ओर अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण मिठाइयों और कन्फेक्शनरी में चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना सरकार के लिए अहम हो गया है।
एथेनॉल बनाने में गन्ने का इस्तेमाल घट सकता है
अगले सीजन में सरकार गन्ने से एथेनॉल बनाने के तरीके में बदलाव पर विचार कर रही है। मौजूदा व्यवस्था में गन्ने के रस और B-हेवी मोलासेस से भी एथेनॉल तैयार किया जाता है। चर्चा यह है कि इन स्रोतों से एथेनॉल बनाने पर रोक लगाकर C-हेवी मोलासेस से उत्पादन की अनुमति दी जा सकती है। ऐसा होने पर ज्यादा गन्ना चीनी बनाने के लिए उपलब्ध होगा। हालांकि, इस बदलाव को लेकर अभी अंतिम आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है और निर्णय अगले महीने के अंत तक आने की संभावना बताई गई है।
E20 पेट्रोल बंद नहीं होगा, बदलेगा एथेनॉल का स्रोत
गन्ने से एथेनॉल का उत्पादन कम होने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। E20 पेट्रोल में इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल सिर्फ गन्ने से नहीं बनता। मक्का, चावल और अलग-अलग प्रकार के मोलासेस से भी फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल तैयार किया जाता है। ऐसे में गन्ने से मिलने वाली मात्रा कम होने पर मक्का और चावल का इस्तेमाल बढ़ाकर E20 की जरूरत पूरी की जा सकती है। यानी पेट्रोल पंप पर मिलने वाले E20 का ब्लेंड बना रह सकता है, भले ही उसके पीछे इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का अनुपात बदल जाए।
मक्का-चावल से बना एथेनॉल इंजन के लिए अलग नहीं
E20 को लेकर सबसे बड़ा सवाल गाड़ी के इंजन पर असर का है। यहां समझने वाली बात यह है कि एथेनॉल का अंतिम फ्यूल-ग्रेड उत्पाद उसके कच्चे माल से अलग होता है। गन्ना, मक्का या चावल से तैयार होने के बाद एथेनॉल एक ही रासायनिक यौगिक C₂H₅OH होता है और पेट्रोल में मिलाने से पहले उसे निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया जाता है। इसलिए इंजन पर असर का संबंध मुख्य रूप से एथेनॉल की गुणवत्ता और ब्लेंडिंग से है, न कि इस बात से कि वह मूल रूप से गन्ने से आया है या मक्का-चावल से।
E20 से इंजन खराब होने की आशंका कितनी?
E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग वाहनों पर किए गए परीक्षणों में ड्राइविंग अनुभव और फ्यूल एफिशिएंसी पर बड़े नकारात्मक प्रभाव की बात सामने नहीं आई है। इन परीक्षणों में पैसेंजर वाहनों को 40 हजार किलोमीटर और दोपहिया वाहनों को 20 हजार किलोमीटर तक चलाकर देखा गया। वहीं, देश में E15 से ज्यादा ब्लेंड वाले पेट्रोल का इस्तेमाल भी कई वर्षों से हो रहा है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था में E20 को वापस E10 पर लाने की संभावना कम बताई जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह देशभर में एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग ब्लेंड की सप्लाई चेन को अलग-अलग तरीके से चलाने की जटिलता भी है।