देश में इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन अब इसे लेकर वाहन मालिकों की चिंताएं भी सामने आने लगी हैं। एक हालिया सर्वे में 2022 या उससे पहले खरीदी गई पेट्रोल गाड़ियों के करीब आधे मालिकों ने दावा किया है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो गया है। 24 हजार से अधिक लोगों की राय पर आधारित इस सर्वे ने नई बहस छेड़ दी है।
माइलेज में बड़ी गिरावट का दावा
सर्वे में शामिल कई वाहन मालिकों ने कहा कि उनकी गाड़ियों का माइलेज पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। कुछ लोगों ने 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट की बात कही, जबकि कई लोगों का दावा है कि माइलेज में 20 प्रतिशत से ज्यादा की कमी महसूस हुई है। यही वजह है कि बढ़ती पेट्रोल कीमतों के बीच यह मुद्दा लोगों के लिए और भी महत्वपूर्ण बन गया है।
सरकारी दावों से अलग अनुभव
सरकार और विशेषज्ञों की ओर से पहले कहा गया था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज पर बहुत सीमित असर पड़ेगा। अनुमान था कि इसमें केवल 1 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। लेकिन अब कई वाहन मालिकों का कहना है कि वास्तविक अनुभव इससे अलग है। हालांकि ये दावे लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित हैं और किसी सरकारी अध्ययन का हिस्सा नहीं हैं।
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पुरानी गाड़ियों पर ज्यादा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 से पहले बनी कई गाड़ियां कम इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के हिसाब से तैयार की गई थीं। ऐसे में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर उनके इंजन पर ज्यादा असर दिखाई दे सकता है। इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से कम मानी जाती है, जिसके कारण समान दूरी तय करने के लिए ज्यादा ईंधन की जरूरत पड़ सकती है।
मरम्मत खर्च को लेकर भी शिकायतें
माइलेज के अलावा कुछ वाहन मालिकों ने इंजन, फ्यूल लाइन और अन्य पुर्जों से जुड़ी समस्याओं की भी शिकायत की है। सर्वे में शामिल कई लोगों ने कहा कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उन्हें अतिरिक्त रखरखाव और मरम्मत खर्च का सामना करना पड़ा। हालांकि इस विषय पर अभी विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
सरकार क्यों बढ़ा रही E20?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होने वाले कच्चे तेल पर निर्भर है। सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी फायदा मिलेगा। इसी रणनीति के तहत E20 के बाद E22, E25 और E30 जैसे विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है। लेकिन दूसरी तरफ वाहन मालिकों की चिंता है कि बढ़ते इथेनॉल मिश्रण के साथ उनकी पुरानी गाड़ियां भविष्य में कितना बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगी।