
मौसम बदलने के साथ ही लोगों को सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी परेशानियां तो होती ही हैं, लेकिन इसके साथ कान के इंफेक्शन का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, तापमान और हवा की नमी में बदलाव से कान के अंदर बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसे हल्के में लेना आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकता है।
क्यों बढ़ता है कान का इंफेक्शन मौसम बदलने पर?
बताते हैं कि सबसे जरूरी है कि कान को अचानक तापमान बदलने से बचाया जाए। ठंडी हवा सीधे कान पर न लगे, बाइक चलाते समय कान ढकें। सर्दी-खांसी को हल्के में न लें, क्योंकि यही अक्सर कान में इंफेक्शन बढ़ाती है। कान में बहुत ज्यादा सफाई की कोशिश न करें और कॉटन बड बहुत अंदर तक न डालें, इससे जलन बढ़ सकती है।
आपके डॉक्टर ने कान के ड्रॉप या दवाएं दी हैं तो पूरा कोर्स लें। नहाते समय पानी कान में जाने से बचें। दर्द ज्यादा हो तो हल्का गर्म सेक, पर्याप्त पानी पीना और आराम लेना मदद करता है। बच्चों में कान खींचना, बेचैनी या बार-बार रोना इंफेक्शन का संकेत हो सकता है, इसे नजरअंदाज न करें। अगर 1-2 दिन में सुधार न दिखे या चक्कर जैसा लगे तो समय पर अपने डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
कैसे करें कान के इंफेक्शन से बचाव?
एक्सपर्ट बताते हैं कि सबसे जरूरी है — कान को अचानक तापमान बदलने से बचाना।
ठंडी हवा से बचने के लिए बाइक चलाते समय कान ढकें।
सर्दी-खांसी का तुरंत इलाज करवाएं।
कॉटन बड या नुकीली चीज कान में बहुत अंदर तक न डालें।
नहाते समय पानी कान में जाने से बचें।
डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं या ईयर ड्रॉप का पूरा कोर्स लें।
अगर दर्द बढ़ जाए, तो हल्का गर्म सेक राहत देता है। पर्याप्त पानी पीना और आराम करना भी जरूरी है।
ये भी जरूरी
कान में नुकीली चीजें न डालें।
लंबे समय तक इयरफोन का इस्तेमाल सीमित रखें।
एलर्जी कंट्रोल में रखें।
इम्यूनिटी को मजबूत रखें।