उत्तरी जापान की धरती सोमवार देर रात अचानक उफनती दिखाई दी, जब 7.5 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया और तटीय क्षेत्रों में सुनामी की लहरें दर्ज की गईं। लगातार आ रहे तेज आफ्टरशॉक्स ने शहरों की सड़कों से लेकर समुद्री किनारों तक दहशत की परतें बिछा दी हैं। हजारों लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं और प्रशासन ने समुद्र से सटे इलाकों के लिए विशेष सतर्कता निर्देश जारी किए हैं।
देर रात हिली धरती, कई ज़िले प्रभावित
भूकंप का केंद्र होंशू के उत्तरी तट के पास समुद्र की गहराई में था, जहां देर रात करीब 11:15 बजे धरती ने जोरदार झटका दिया। तटवर्ती इलाकों में स्थानीय चेतावनी सिस्टम सक्रिय हुए और लहरों की ऊंचाई 50 से 70 सेंटीमीटर के बीच दर्ज की गई। कई स्थानों पर जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लोग घरों से बाहर निकलकर खुली जगहों में रात बिताने को मजबूर हुए।
आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई चिंता
मुख्य भूकंप के बाद लगातार तेज आफ्टरशॉक्स महसूस किए जा रहे हैं, जिससे डर और बढ़ गया है। आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने अनुमान जताया है कि आने वाले दिनों में और झटके आ सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र में 8 तीव्रता तक के बड़े भूकंप की संभावना को थोड़ा बढ़ा हुआ बताया है, जिसके बाद 182 नगर पालिकाओं को अपनी आपातकालीन तैयारी मजबूत करने के निर्देश मिले हैं।
बिजली और ट्रेनों पर संकट, सेवाएं रुकीं
झटकों के बाद लगभग 800 घरों में बिजली गुल हो गई, जबकि तेज झटकों की वजह से हाई-स्पीड ट्रेन सेवाएं और कुछ स्थानीय रूट्स को एहतियातन रोक दिया गया। तटीय इलाकों में चल रही फेरी सेवाओं को भी रोक दिया गया है। प्रशासन ने नागरिकों को ऊंचे स्थानों पर शरण लेने और समुद्र से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।
परमाणु संयंत्रों की जांच जारी
ताकतवर झटकों का असर क्षेत्र के परमाणु ईंधन संयंत्रों तक भी पहुंचा। जांच के दौरान एक संयंत्र के शीतलन क्षेत्र से लगभग 450 लीटर पानी फैलने की पुष्टि हुई, हालांकि अधिकारी इसे नियंत्रित और सुरक्षित स्थिति में बता रहे हैं। विशेषज्ञ लगातार सभी यूनिट्स की सुरक्षा जांच कर रहे हैं ताकि किसी बड़ी तकनीकी समस्या की संभावना को खत्म किया जा सके।
2011 की त्रासदी की याद ताज़ा, लोगों में चिंता
इस भूकंप ने लोगों को 2011 की उस भयावह आपदा की याद दिला दी, जब शक्तिशाली झटकों और सुनामी ने भारी तबाही मचाई थी। लोग सोशल प्लेटफॉर्म पर अपनी स्थिति बताते हुए प्रार्थनाएं कर रहे हैं और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार हालात की निगरानी कर रही हैं और आने वाले 48 घंटे को बेहद महत्वपूर्ण मान रही हैं।