एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों और चुनाव आयोग के भीतर कथित तौर पर सामने आई अलग-अलग राय के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों, नियमों और लंबे समय से चली आ रही संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत काम करने वाला बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय है। आयोग के मुताबिक, उसकी आंतरिक कार्यप्रणाली में सुझाव, टिप्पणियां, तकनीकी राय और समीक्षा जैसी प्रक्रियाएं नियमित रूप से होती हैं। इनका उद्देश्य चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और कानून के अनुरूप बनाए रखना है।
आयोग के आदेश तय कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार ही जारी किए जाते हैं। आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया कानून में निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप होती है। आयोग के अनुसार, किसी प्रस्ताव के अंतिम रूप लेने से पहले सदस्यों की ओर से सवाल उठाना, सुझाव देना या किसी प्रक्रिया पर चर्चा करना सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है। इसका मकसद मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया में सुधार करना है।
अलग-अलग राय को आयोग ने बताया विचार-विमर्श का हिस्सा
आयोग ने कहा कि किसी भी बड़े संस्थान में निर्णय लेने से पहले अलग-अलग विचार सामने आना स्वाभाविक है। अंतिम निर्णय से पहले होने वाली ऐसी चर्चाएं संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। आयोग के मुताबिक, केवल चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि चुनाव व्यवस्था से जुड़े अधिकारी भी अपनी विशेषज्ञता के आधार पर सुझाव दे सकते हैं। आयोग ने कहा कि आंतरिक टिप्पणियों को अंतिम निर्णय मानना उचित नहीं है, क्योंकि किसी प्रस्ताव पर चर्चा और उसके बाद लिए गए अंतिम फैसले अलग-अलग चरण होते हैं।
10 महीने की चुनिंदा टिप्पणियों से पूरी तस्वीर नहीं मिलती: आयोग
चुनाव आयोग ने कहा कि पिछले करीब 10 महीनों के दौरान सामने आई कुछ आंतरिक टिप्पणियों या नोट्स के आधार पर पूरी संस्थागत प्रक्रिया का आकलन नहीं किया जा सकता। आयोग के अनुसार, इसी अवधि में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए और करीब 40 नई पहल शुरू की गईं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण सहित कई चुनावी सुधार भी किए गए। आयोग का दावा है कि पिछले एक वर्ष में लिए गए ये फैसले पूर्ण आयोग की सहमति से किए गए हैं। आयोग ने बिहार सहित कई राज्यों में चुनाव कराने का भी उल्लेख किया।
डिजिटल व्यवस्था और संवैधानिक जिम्मेदारी पर जोर
आयोग ने अपने डिजिटल मंच ईसीआईनेट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी जानकारी दी। उसके अनुसार, डिजिटल प्रणालियों को अनधिकृत बदलाव और किसी भी तरह के हस्तक्षेप से बचाने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं। आयोग ने कहा कि आईटी सुरक्षा जांच और नियमित ऑडिट सामान्य साइबर सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा हैं। वहीं, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी कानून के तहत मतदाता पंजीकरण तथा नाम हटाने जैसी जिम्मेदारियां निभाते हैं। आयोग ने अंत में कहा कि वह अपने संवैधानिक दायित्वों का पूरी निष्ठा से पालन करने और लोकतांत्रिक चुनाव व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।