चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की समयसीमा बढ़ाकर करोड़ों वोटर्स को राहत दी है। यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़ समेत छह राज्यों में SIR के लिए नया संशोधित शेड्यूल जारी कर दिया गया है। कई राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने समय बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिसके बाद आयोग ने यह बड़ा फैसला लिया। अब मतदाता जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निर्धारित तारीख से आगे तक जारी रहेगी और नई वोटर लिस्ट भी देर से प्रकाशित होगी।
छह राज्यों के लिए बढ़ी SIR समयसीमा
चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के लिए समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया। यह विस्तार यूपी, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, गुजरात और अंडमान-निकोबार समेत कई राज्यों में लागू होगा। इससे पहले SIR की अंतिम तारीख 11 दिसंबर निर्धारित थी, लेकिन राज्यों की मांग पर इसे आगे बढ़ा दिया गया है। अब अपडेटेड वोटर लिस्ट 19 नवंबर को जारी की जाएगी।
पहले भी बढ़ाई गई थी समयसीमा
30 नवंबर को भी आयोग ने SIR की अवधि सात दिन बढ़ाई थी। नए शेड्यूल के अनुसार, मतदाता जोड़ने और हटाने का वेरिफिकेशन अब 11 दिसंबर तक चलेगा, जो पहले 4 दिसंबर तक तय था। साथ ही, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट, जो 9 दिसंबर को जारी होनी थी, अब 16 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को घोषित की जाएगी।
राजनीतिक दलों को मिलेगी विशेष सूची
चुनाव आयोग ने राज्यों को निर्देश दिया है कि राजनीतिक दलों के बूथ-लेवल एजेंट्स (BLA) को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने से पहले विशेष सूची उपलब्ध कराई जाए। इसमें मृत, स्थानांतरित और अनुपस्थित मतदाताओं का विस्तृत विवरण होगा। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन बनाना है, जिससे भविष्य में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
बीएलओ से तीन बार संपर्क न होने पर बनेगी सूची
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि हर बूथ के हिसाब से अनुपस्थित, मृत या डुप्लीकेट वोटरों की सूची तैयार की जाए। यह वे मतदाता होंगे जिनसे बीएलओ तीन प्रयासों के बाद भी संपर्क नहीं कर पाए। यह प्रक्रिया पहले बिहार में भी अपनाई गई थी और परिणाम संतोषजनक रहे थे। इस मॉडल को अब अन्य राज्यों में भी लागू किया जा रहा है।
वोटर लिस्ट को पारदर्शी बनाने की तैयारी
चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। SIR प्रक्रिया के विस्तार से अधिक नागरिकों को सूची में सुधार कराने का अवसर मिलेगा। संशोधित शेड्यूल से राज्यों को राहत मिली है और राजनीतिक दलों को भी बूथ-स्तर पर अधिक स्पष्टता प्राप्त होगी। आयोग मानता है कि यह प्रक्रिया आगामी चुनावों की तैयारी को मजबूत करेगी।