अगर आपके बैंक खाते से हर महीने EMI, SIP, बीमा प्रीमियम या किसी अन्य ऑटो-डेबिट के जरिए भुगतान होता है, तो खाते में पर्याप्त बैलेंस रखना बेहद जरूरी है। बैलेंस कम होने पर ट्रांजैक्शन फेल हो सकता है और बैंक आपसे ECSRTN चार्ज वसूल सकता है।
क्या है ECSRTN चार्ज?
ECSRTN यानी Electronic Clearing Service Return चार्ज वह शुल्क है, जो तब लगाया जाता है जब ऑटो-डेबिट के समय आपके खाते में पर्याप्त पैसा नहीं होता और भुगतान सफल नहीं हो पाता। यह नियम EMI, SIP, बीमा प्रीमियम और अन्य ऑटो-डेबिट भुगतानों पर लागू हो सकता है।
कितना देना पड़ सकता है?
ECSRTN चार्ज की राशि हर बैंक में अलग-अलग हो सकती है। कई सरकारी बैंक प्रति फेल ट्रांजैक्शन करीब ₹250 तक शुल्क लेते हैं, जबकि कुछ निजी बैंक ₹500 या उससे अधिक भी वसूल सकते हैं। इसके अलावा इस शुल्क पर GST भी लग सकता है।
क्या हो सकता है नुकसान?
अगर एक से ज्यादा ऑटो-डेबिट एक ही दिन फेल हो जाते हैं, तो हर ट्रांजैक्शन पर अलग-अलग चार्ज लग सकता है। इससे अतिरिक्त आर्थिक नुकसान हो सकता है। वहीं, अगर लोन या क्रेडिट कार्ड की EMI समय पर नहीं कटती, तो CIBIL स्कोर भी प्रभावित हो सकता है।
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निवेश पर भी पड़ सकता है असर
लगातार ऑटो-डेबिट फेल होने का असर SIP जैसे निवेश पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, लगातार कई बार SIP भुगतान फेल होने पर निवेश से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए समय पर भुगतान सुनिश्चित करना जरूरी है।
कैसे बचें ECSRTN चार्ज से?
ऑटो-डेबिट की तारीख से पहले खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें। बैंक के SMS और ईमेल अलर्ट चालू रखें, ताकि समय पर जानकारी मिल सके। साथ ही, बैंक में दर्ज ECS/NACH मैंडेट, अकाउंट नंबर और IFSC जैसी जानकारी सही रखें।
समय रहते करें जरूरी बदलाव
अगर किसी वजह से भुगतान की तारीख बदलनी हो या ऑटो-डेबिट में कोई बदलाव करना हो, तो पहले से बैंक से संपर्क करें। समय पर योजना बनाकर आप ECSRTN चार्ज, अतिरिक्त खर्च और CIBIL स्कोर पर पड़ने वाले असर से बच सकते हैं।