मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीले कफ सिरप से 21 बच्चों की मौत के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मोर्चा संभाल लिया है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स और तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल विभाग से जुड़े 7 ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि कंपनी ने गुणवत्ता जांच में लापरवाही बरती, जिससे बच्चों की जान चली गई। ईडी अब सिरप बिक्री से हुई अवैध कमाई की फंड ट्रेल खंगाल रही है।
मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ईडी की कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, ईडी की पांच सदस्यीय टीम ने तमिलनाडु के कोडंबक्कम में श्रीसन फार्मा मालिक के आवास और ऑफिस पर छापा मारा। इसके साथ ही दो ड्रग इंस्पेक्टर्स और ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट के इन-चार्ज डायरेक्टर के घरों की भी तलाशी ली गई। जांच में पाया गया कि कंपनी ने जानबूझकर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की और इससे भारी मुनाफा कमाया।
डाइएथिलीन ग्लाइकॉल बना मौत की वजह
कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला केमिकल पाया गया, जिसने बच्चों की किडनी फेल कर दी। यह सिरप सांस की समस्या में दिया जा रहा था, लेकिन लेबल पर किसी भी तरह की चेतावनी नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण 21 बच्चों की जान चली गई।
भ्रष्टाचार और रिश्वत का जाल
तमिलनाडु सरकार ने जांच के बाद दो ड्रग इंस्पेक्टर्स को सस्पेंड कर दिया। वहीं, ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट के डायरेक्टर को एंटी करप्शन ब्यूरो ने रिश्वत लेते हुए पकड़ा। इन सभी पर ईडी ने ईसीआईआर दर्ज किया है। अब एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि अवैध कमाई कहां-कहां ट्रांसफर हुई।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। वहीं केंद्र सरकार ने दवा निर्माण कंपनियों पर सख्ती की बात कही है। केरल में श्रीसन फार्मा की सभी दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह मामला देश के दवा उद्योग में पारदर्शिता और सुरक्षा की जरूरत को उजागर करता है।