Delhi News : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार रात (12 नवंबर) को जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (JIL) के प्रबंध निदेशक (MD) मनोज गौर को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई घर खरीदारों के 12,000 करोड़ रुपये के कथित गबन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई. ED के अधिकारियों ने पुष्टि की कि गौर को नोएडा स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया, जबकि आज गुरुवार (13 नवंबर) को उन्हें दिल्ली की विशेष PMLA कोर्ट में पेश किया जाएगा.
मामले की पूरी जानकारी
गिरफ्तारी का समय और कारण: गिरफ्तारी 12 नवंबर 2025 की रात को हुई, जो ED की मई 2025 से चल रही जांच का हिस्सा है। ED का आरोप है कि मनोज गौर ने JIL और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के माध्यम से घर खरीदारों से वसूले गए फंड्स को अन्य परियोजनाओं, कर्ज चुकाने और शेल कंपनियों में डायवर्ट किया. इससे लगभग 12,000 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई. JIL का 'जेपी विश्वास' प्रोजेक्ट यमुना एक्सप्रेसवे पर नोएडा के पास स्थित है, जहां 2014 से हजारों खरीदारों ने फ्लैट्स के लिए करोड़ों रुपये दिए। लेकिन डिलीवरी में देरी और फंड्स की हेराफेरी के आरोप लगे। दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की ईओडब्ल्यू ने 2023 में FIR दर्ज की थी, जिस पर ED ने PMLA केस चलाया.
उल्लेखनीय है कि 23 मई 2025 को ED ने दिल्ली-NCR, गाजियाबाद और मुंबई के 15 ठिकानों पर छापे मारे, जहां 1.70 करोड़ रुपये नकद, अचल संपत्ति दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए। छापों में गौर संस, महागुन, गुलशन होम्स और सुरक्षा रियल्टी जैसी कंपनियां भी शामिल थीं.
गिरफ्तारी के बाद की स्थिति
पूछताछ और कोर्ट:
गौर को गिरफ्तार करने से पहले ED ने कई दिनों तक पूछताछ की, जहां उन्होंने जांच में कथित तौर पर गैर-सहयोग किया। ED 14 दिनों की रिमांड की मांग कर सकता है ताकि फंड्स के फ्लो और अन्य आरोपी बनाए जा सकें. जेपी ग्रुप के संस्थापक जयप्रकाश गौड़ (जेपी गौड़) और उनके परिवार के सदस्य पहले से जांच के दायरे में हैं। 2021 में गौड़ की बेटी रीता दीक्षित और दामाद विजय कांत दीक्षित को हेराफेरी केस में गिरफ्तार किया गया था.
प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
खरीदारों पर असर: इससे जुड़े 10,000 से अधिक घर खरीदार वर्षों से फ्लैट्स का इंतजार कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में JIL को दिवालिया होने से रोका था और प्रोजेक्ट पूरा करने के आदेश दिए थे, लेकिन डिलीवरी जून 2026 से दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई। गिरफ्तारी से खरीदार संगठनों में आक्रोश फैल गया है. जेपी ग्रुप की हालत: ग्रुप पहले से 50,000 करोड़ से अधिक कर्ज में डूबा है। 2021 में NBCC को प्रोजेक्ट्स सौंपे गए थे, लेकिन विवाद जारी हैं. कंपनी ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया. ED का बयान: ED ने इसे "आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्त मुहिम" का हिस्सा बताया। आगे जांच में अन्य सहयोगी फर्मों पर फोकस होगा.