
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में फंसे छांगुर बाबा (जलालुद्दीन) और उनके साथी नवीन रोहरा उर्फ जमालुद्दीन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. इन दोनों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लखनऊ की कोर्ट में 10 दिन की कस्टडी रिमांड के लिए अर्जी लगाई है. इस पर कोर्ट में 24 जुलाई को सुनवाई होगी.
क्या है मामला?
छांगुर बाबा पर पिछले 15 सालों से धर्मांतरण का रैकेट चलाने का आरोप है. बताया जा रहा है कि उन्होंने हजारों हिंदुओं को इस्लाम में परिवर्तित करवाया. इसमें हनी-ट्रैपिंग, डराने-धमकाने और नाबालिगों को निशाना बनाने जैसे हथकंडे अपनाए गए. उत्तर प्रदेश एटीएस के अनुसार, छांगुर के पास से मिले रजिस्टरों में करीब 5000 लोगों के नाम दर्ज हैं जो धर्म बदल चुके हैं.
विदेशी फंडिंग का बड़ा मामला
ईडी की जांच में पता चला है कि छांगुर बाबा के नेटवर्क को करीब 60 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग मिली थी. यह पैसा विदेशी बैंकों से भारत लाकर धर्मांतरण, प्रचार और बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया. ईडी अब इस पैसे के स्रोत और उसके इस्तेमाल की गहराई से जांच कर रही है.
संदिग्ध कंपनियों और विदेशी कनेक्शन की जांच
ईडी को जांच में पनामा और साउथ अफ्रीका की कंपनियों का लिंक भी मिला है. एक कंपनी – Logos Marine S.A. को नवीन रोहरा ने 2003 में साउथ अफ्रीका में रजिस्टर करवाया था. इसके अलावा Krishna International और United Marine जैसी कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत भी सामने आए हैं. माना जा रहा है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल विदेश से फंड लाकर भारत में अवैध संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया.
हबीब बैंक का स्टेटमेंट भी जांच में शामिल
ईडी को छापेमारी के दौरान हबीब बैंक का एक स्टेटमेंट मिला है, जिसमें कई संदिग्ध लेनदेन दर्ज हैं. माना जा रहा है कि यह लेनदेन हवाला और विदेशी फंडिंग से जुड़े हो सकते हैं. इसके आधार पर अब ईडी दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ करेगी.
छापेमारी में क्या मिला?
ईडी ने 17 जुलाई को बलरामपुर, लखनऊ और मुंबई में 15 जगहों पर छापेमारी की थी. इस दौरान विदेशी फंडिंग से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, हवाला ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड और बेनामी संपत्तियों के सबूत जब्त किए गए.
जांच में यह भी पता चला है कि छांगुर ने कई संपत्तियां अपने सहयोगी नवीन रोहरा और महिला साथी नीतू उर्फ नसरीन के नाम पर खरीदीं ताकि अपनी संलिप्तता छिपाई जा सके.
कुल मिलाकर ईडी की कार्रवाई से साफ है कि यह मामला सिर्फ धर्मांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसा लाकर भारत में अवैध कामों में इस्तेमाल करने का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था. अगर कोर्ट से ईडी को पूछताछ की इजाज़त मिलती है, तो इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.