पश्चिम बंगाल में मंगलवार की सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रवर्तन निदेशालय यानी प्रवर्तन निदेशालय ने एक साथ 10 ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी। यह कार्रवाई कथित अवैध कोयला खनन और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई। ईडी की टीम ने कोलकाता समेत कई इलाकों में दस्तक दी, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।
कोयला माइनिंग और पैसे के खेल की जांच
ईडी की यह छापेमारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी का फोकस यह जानना है कि अवैध कोयला खनन और उसके परिवहन से कमाए गए पैसे को किस तरह इधर-उधर किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला राज्य की सियासत और प्रशासन दोनों के लिए बड़ा झटका बन सकता है।
किन लोगों के ठिकानों पर हुई कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, इस ताजा कार्रवाई में राज्य पुलिस के अधिकारी मनोरंजन मंडल सहित कई नाम जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा किरण खान, शेख अख्तर, प्रबीर दत्ता और मिर्जा एच बेग जैसे लोगों के ठिकानों पर भी ईडी की टीम पहुंची। इन सभी पर शक है कि वे कथित कोयला कारोबार से जुड़े पैसों के लेनदेन में शामिल रहे हैं। जांच आगे बढ़ने पर और नाम सामने आ सकते हैं, जिससे मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
ये भी पढ़ें : Ration Card खो गया तो घबराएं नहीं, बस ये एक काम कर लिया तो सस्ते राशन का हक वापस मिल जाएगा
पहले से चल रही जांच से अलग मामला
अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कार्रवाई उस दूसरे कोयला घोटाले से अलग है, जिसकी जांच पहले से चल रही है। पिछले महीने ईडी ने कोलकाता में राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC के दफ्तरों पर भी छापा मारा था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि जांच एजेंसी बंगाल में आर्थिक अपराधों को लेकर दबाव बढ़ा रही है। इसका असर आने वाले दिनों में और गहराने की आशंका है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मामला अदालत तक भी पहुंच गया है। ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार का जवाबी हलफनामा मिला है और उस पर जवाब देने के लिए समय चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टाल दी। इससे पहले अदालत ने ममता बनर्जी, राज्य सरकार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया था।
सियासत और जांच का टकराव तेज
पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत में कहा है कि I-PAC कार्यालय पर छापेमारी के दौरान राज्य मशीनरी के हस्तक्षेप को लेकर ईडी की याचिका सही नहीं है। सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट में इसी तरह का मामला लंबित होने का हवाला दिया है। इस पूरे विवाद से एक बात साफ है कि जांच एजेंसी की कार्रवाई से राज्य सरकार और केंद्र के बीच टकराव और गहराने वाला है। अगर आरोप साबित हुए, तो इसका राजनीतिक और आर्थिक नुकसान दोनों ही स्तर पर देखने को मिल सकता है।