
बाइक बोट घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की स्पेशल टास्क फोर्स ने बड़ी कार्रवाई की। धन शोधन निवारण अधिनियम ( PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत 394.42 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अचल और चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर दी है। ये संपत्तियां विभिन्न नाम पर दर्ज हैं। कामाख्या एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट, कामाख्या एजुकेशनल सोसायटी, गुरु नानक चैरिटेबल ट्रस्ट, अल्पाइन टेक्निकल एजुकेशन सोसाइटी, एपी गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट और मीना आनंद इन के नाम संपत्तियां पर थीं।
अतिरिक्त निवेशक जोड़ने पर प्राइज दिया जाता था
जीआईपीएल और उसके प्रमोटर संजय भाटी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर बाइक बोट नाम से बाइक टैक्सी सर्विस की आड़ में बेहद आकर्षक निवेश योजनाएं सामने रखी थीं। इसके तहत ग्राहक 1, 3, 5 या 7 बाइकों में निवेश कर सकता था। इनका रखरखाव और संचालन कंपनी की ओर से किया जाता है। निवेशक को मासिक किराया, ईएमआई और बोनस दिया जाता था। बाइनरी और मल्टी-लेवल संरचना में अतिरिक्त निवेशक जोड़ने पर प्राइज दिया जाता था।
धनराशि को विभिन्न संबंधित कंपनियों में डायवर्ट किया
कंपनी ने विभिन्न शहरों में फ्रैंचाइजी भी आवंटित की। इन शहरों में बाइक टैक्सी का संचालन कठिनाई से हुआ। ईडी की जांच में सामने आया है कि बाइक बोट घोटाले से आई धनराशि को विभिन्न संबंधित कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया। इसके बाद शैक्षणिक ट्रस्टों, सोसायटियों और व्यक्तियों के जरिए इसे लिया गया। इन डायवर्ट की धनराशि का उपयोग मेरठ में अचल संपत्तियां खरीदने में किया। बैंकों से पहले से गिरवी रखी गई संपत्तियों को छुड़ाने के लिए किया गया। कुर्की में 20.49 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियां और गिरवी जमीन शामिल हैं। इनका मूल्य 1000 करोड़ रुपए है। इस अपराध के वक्त के समय 389.30 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति, साथ ही कुल 5.12 करोड़ रुपए की जमा राशि भी जब्त की गई।