Cough syrup case: कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट मामले में ईडी की इंट्री के बाद कार्रवाई तेज होती हुई नजर आ रही है और लगातार आरोपियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। ईडी की टीम ने शुक्रवार को लखनऊ में बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की आलीशान कोठी सहित 25 ठिकानों पर छापेमारी की। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उत्तर प्रदेश, झारखंड और गुजरात में फैले कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बड़े पैमाने पर छापेमारी की। यह कार्रवाई सुबह करीब 7:30 बजे शुरू हुई और कुल 25 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई। इनमें लखनऊ के पॉश इलाके सुशांत गोल्फ सिटी में बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की आलीशान कोठी भी शामिल है, जहां ईडी ने दस्तावेज, नकदी और अन्य सामग्री जब्त की।
छापेमारी के मुख्य स्थान
उत्तर प्रदेश: लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर, सहारनपुर है। अन्य राज्य रांची (झारखंड), अहमदाबाद (गुजरात) में छापेमारी की गई। यह ऑपरेशन ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय के नेतृत्व में चला, और इसमें मैन्युफैक्चरर्स, सप्लायर्स और हवाला ऑपरेटर्स के ठिकाने शामिल हैं।
32 से अधिक गिरफ्तारियां की
यह केस मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद शुरू हुई जांच से जुड़ा है, जो उत्तर प्रदेश में 1000-2000 करोड़ रुपये के अवैध कारोबार तक पहुंच गया। मुख्य आरोपी वाराणसी के शुभम जायसवाल (फिलहाल दुबई फरार) के नेतृत्व में यह सिंडिकेट कोडीन-आधारित कफ सिरप (सीबीसीएस) का उत्पादन, तस्करी और सीमापार सप्लाई करता था। यूपी एसटीएफ ने अब तक 87 एफआईआर दर्ज की हैं और 32 से अधिक गिरफ्तारियां की हैं, जिनमें आलोक सिंह, अमित सिंह टाटा (शुभम का प्रमुख सहयोगी), भोला जायसवाल (शुभम के पिता) और अन्य शामिल हैं।
बर्खास्त सिपाही था सिंडिकेट में सक्रिय
पूर्व एसटीएफ सिपाही आलोक सिंह को सिंडिकेट का प्रमुख सदस्य माना जा रहा है। वह निलंबित और बाद में बर्खास्त हो चुका है। एसटीएफ ने उसे 10 दिसंबर को गिरफ्तार किया था, लेकिन ईडी की जांच मनी लॉन्ड्रिंग पर केंद्रित है। उसकी कोठी से मिले सामान से उसके अवैध कारोबार के सबूत मिलने की उम्मीद है। अन्य आरोपी अमित सिंह टाटा, चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल, और कई मैन्युफैक्चरर्स जो फर्जी दस्तावेजों से सिरप सप्लाई करते थे। कुल 50 से अधिक संदिग्धों पर नजर है।
याचिका पर 22 दिसंबर को सुनवाई
छापेमारी का उद्देश्य ईडी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएल) के तहत जांच कर रही है, जिसमें हवाला ट्रांजेक्शन, फर्जी बिलिंग और विदेशी रेमिटेंस शामिल हैं। पिछले दो महीनों में एसटीएफ की छापेमारियों से 30 से अधिक एफआईआर आधारित यह कार्रवाई अवैध फंड्स की ट्रेलिंग पर फोकस्ड है। आलोक सिंह और अमित टाटा की जमानत याचिका पर 22 दिसंबर को सुनवाई होनी है। यह कार्रवाई यूपी में ड्रग तस्करी के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है, और ईडी के बयान के अनुसार, इससे सिंडिकेट के फाइनेंशियल नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी। आगे की अपडेट्स के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर रखें।