समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का दायरा बढ़ने की खबर है। मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के तहत संचालित इस विश्वविद्यालय को आर्थिक मदद देने वाले 11 दानदाताओं और उनसे जुड़ी संस्थाओं की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि इनमें कारोबारी, निजी कंपनियां और अन्य संस्थाएं शामिल हैं। जांच का उद्देश्य दान के स्रोत और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटाना है।
शेल कंपनियों के जरिए लेनदेन की आशंका
जांच से जुड़े आरोपों के अनुसार, कुछ कंपनियों के जरिए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन किए जाने की आशंका है। इन्हें शेल कंपनियां बताया जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि इन कंपनियों का वास्तविक कारोबार क्या था और जौहर ट्रस्ट को दिए गए धन का स्रोत क्या है। हालांकि, इन आरोपों की जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। जांच के दायरे में आने का मतलब अपने आप में किसी व्यक्ति या संस्था का दोषी होना नहीं है।
इन दानदाताओं और संस्थाओं के नाम चर्चा में
जांच के दायरे में बताए जा रहे नामों में पिरामिड कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, लखनऊ; सालार ओवरसीज लिमिटेड, मुरादाबाद; ए.आर. एजुकेशन ट्रस्ट; अर्थ कम्युनिकेशनल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा; रामिगेट इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली; रॉयल एम्पोरिया इंफ्रा टेक प्राइवेट लिमिटेड; फैजा परवीन, मुरादाबाद; मोहम्मद हसीब, बहराइच; रोबोट विनिमय प्राइवेट लिमिटेड; वंडर सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड और ड्रीम ऑफ पर्ल रियल्टी एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड शामिल बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रोबोट विनिमय प्राइवेट लिमिटेड को सूची से हटाया जा चुका है, जबकि ड्रीम ऑफ पर्ल रियल्टी एंड सर्विसेज को हटाने की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पहले से चल रही जांच
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में ईडी की जांच रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इन एफआईआर में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय के लिए किसानों की कृषि भूमि जबरन अधिग्रहित की गई थी। इसी मामले से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। मामले में आरोपों की सच्चाई तय करना जांच एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया का हिस्सा है।
आजम खान की न्यायिक हिरासत का भी मामला
खबर के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी के बाद आजम खान को गाजियाबाद की एमपी-एमएलए अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजा था। रिपोर्ट में 14 दिन की न्यायिक हिरासत और 13 नवंबर तक हिरासत में रहने का उल्लेख किया गया है। दानदाताओं और संबंधित कंपनियों के लेनदेन की जांच आगे बढ़ने से मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, जांच के नतीजों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।