ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब मध्य प्रदेश के इंदौर के बाजारों में साफ नजर आने लगा है। खासतौर पर ईरान से आने वाले सूखे मेवों की सप्लाई ठप होने से कीमतें आसमान छू रही हैं। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने ट्रांसपोर्ट, खेती और उद्योग तीनों सेक्टर को झटका दिया है, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
सूखे मेवों पर ‘ब्रेक’, कीमतों में बेतहाशा उछाल
ईरान से आयात होने वाले सूखे मेवों की सप्लाई बाधित होने से बाजार में इनकी भारी कमी हो गई है। खासतौर पर ईरानी पिस्ता की कीमतें 2500 रुपए किलो तक पहुंच गई हैं। व्यापारियों के अनुसार, आयात पूरी तरह रुकने से आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे त्योहार और शादी सीजन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
तेल महंगा, ट्रांसपोर्ट ने बिगाड़ा गणित
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ा है। इंदौर में माल ढुलाई महंगी होने से हर रोज इस्तेमाल होने वाली चीजों की लागत बढ़ गई है। मूंगफली तेल 210 रुपए, सोयाबीन तेल 180 रुपए और सरसों तेल 190 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुका है, जिससे घरेलू बजट बिगड़ने लगा है।
खेती पर असर, दाल-चावल भी महंगे
महंगे ईंधन और उर्वरकों की वजह से खेती की लागत भी बढ़ गई है। इसका असर अनाज और दालों के दाम पर साफ दिख रहा है। चना दाल 110 रुपए और तुवर दाल 145 रुपए किलो तक पहुंच गई है, जबकि बासमती चावल 95 रुपए किलो बिक रहा है। किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
उद्योगों पर संकट, उत्पादन लागत में उछाल
इंदौर और पीथमपुर के हजारों उद्योगों पर भी इस वैश्विक संकट का असर पड़ा है। कच्चे माल जैसे कॉपर, पीतल और एल्युमिनियम के दाम 17% से 24% तक बढ़ गए हैं। इससे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की उत्पादन लागत बढ़ गई है और कई जगह ऑर्डर में देरी या कैंसिलेशन की स्थिति बन रही है।
निर्यात पर ब्रेक, आर्थिक गतिविधियां धीमी
इंदौर और पीथमपुर का कुल निर्यात करोड़ों में होता है, लेकिन युद्ध के बाद इसमें गिरावट देखी जा रही है। व्यापारिक मार्गों में बाधा और बढ़ती लागत के चलते निर्यात प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।