आठवें वेतन आयोग को लेकर अब कर्मचारी यूनियनों ने सरकार के सामने नई और बड़ी मांग रख दी है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा वेतन तय करने का फार्मूला अब पुराने दौर के हिसाब से बना हुआ है और यह आज की जरूरतों के मुताबिक सही नहीं माना जा सकता। इसी वजह से अब परिवार की यूनिट को तीन से बढ़ाकर पांच करने की मांग लगातार तेज होती जा रही है। इस मांग ने लाखों केंद्रीय कर्मचारियों के बीच नई उम्मीद जगा दी है।
पुराना फार्मूला बना मुद्दा
आजादी के बाद से न्यूनतम वेतन तय करने के लिए एक तय फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस व्यवस्था में माना जाता है कि एक कर्मचारी के परिवार में कर्मचारी खुद जीवनसाथी और दो बच्चे शामिल होते हैं। इसी आधार पर खाने रहने और बाकी जरूरतों का खर्च जोड़कर वेतन तय किया जाता है। लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अब यह व्यवस्था वास्तविक परिस्थितियों से काफी दूर हो चुकी है और इसे बदलना जरूरी हो गया है।
माता पिता को जोड़ने की मांग
कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि आज के समय में ज्यादातर कर्मचारियों पर बुजुर्ग माता पिता की जिम्मेदारी भी होती है। दवा इलाज और रोजमर्रा के खर्च का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी वजह से यूनियनों ने परिवार की यूनिट को पांच करने का सुझाव दिया है। उनके मुताबिक कर्मचारी और जीवनसाथी को एक यूनिट जबकि माता पिता को अलग अलग यूनिट माना जाना चाहिए ताकि वेतन तय करते समय वास्तविक पारिवारिक खर्च का सही आकलन हो सके।
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सैलरी में बड़ा बदलाव संभव
अगर सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है तो कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा न्यूनतम वेतन 18000 रुपये से बढ़कर करीब 50000 से 70000 रुपये तक पहुंच सकता है। इससे केवल बेसिक सैलरी ही नहीं बल्कि महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता जैसी दूसरी सुविधाओं में भी बड़ा बदलाव दिखाई देगा। यही वजह है कि कर्मचारी संगठनों की इस मांग को काफी अहम माना जा रहा है।
पेंशन पर भी असर
नए फार्मूले का असर केवल नौकरी कर रहे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। अगर बेसिक वेतन में बढ़ोतरी होती है तो पेंशन पाने वाले लाखों पूर्व कर्मचारियों को भी इसका फायदा मिलेगा। पेंशन और दूसरे भत्तों में भी उसी अनुपात में वृद्धि हो सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में पुराने वेतन ढांचे के साथ गुजारा करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है और बदलाव अब जरूरी हो गया है।
सरकार के फैसले पर नजर
अब देशभर के लाखों कर्मचारियों की नजर केंद्र सरकार और आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई है। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि इस बार सरकार बदलते सामाजिक ढांचे और पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखकर फैसला ले सकती है। अगर परिवार की यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव मान लिया जाता है तो यह कर्मचारियों और पेंशनधारकों दोनों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है और वेतन व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है।