Bulandshahr News: कहते हैं वक्त बदलते देर नहीं लगती। जो दंपती सात समंदर पार अपनी शादी की 50वीं सालगिरह का जश्न मनाने गया था, उसे क्या पता था कि खुशियों का यह सफर जिंदगी के सबसे कठिन इम्तिहान में बदल जाएगा। अनूपशहर के बिरौली गांव निवासी विद्यालय प्रबंधक प्रेमपाल सिंह और उनकी पत्नी आशा सिंह के लिए पिछला एक हफ्ता किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं था।
जश्न के बाद अचानक पसरा सन्नाटा
25 फरवरी को यह दंपती बड़े उत्साह के साथ दुबई पहुंचा था। 26 फरवरी को स्वर्ण जयंती (गोल्डन जुबली) का भव्य जश्न मनाया गया, लेकिन 27 फरवरी से नियति ने करवट बदली। दुबई में बिगड़ते हालात और अचानक मूसलाधार बारिश व अन्य कारणों से वहां 'अलर्ट' जारी कर दिया गया। देखते ही देखते एयरपोर्ट बंद हो गया और उड़ानें रद्द कर दी गईं।
होटल के कमरों में कैद और 'डिप्रेशन' का साया
प्रेमपाल सिंह बताते हैं कि 28 फरवरी से 2 मार्च के बीच का समय सबसे कष्टदायक था। भारतीय दूतावास से संपर्क नहीं हो पा रहा था और घर वापसी की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। होटल के कमरे में कैद होकर वे खुद को असहाय महसूस कर रहे थे। स्थिति इतनी विकट थी कि उन्होंने इसे 'डिप्रेशन' जैसा अनुभव बताया। केवल फोन पर घर मौजूद बच्चों की आवाज ही उनका एकमात्र सहारा थी।
होटल प्रबंधन की संवेदनहीनता और मुश्किल राह
दुबई प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कि पर्यटकों से रुकने और खाने का शुल्क न लिया जाए, स्थानीय होटल प्रबंधन ने संवेदनहीनता दिखाई। भारी संकट के बीच भी उनसे भुगतान वसूला गया और केवल नाममात्र की छूट दी गई। अनिश्चितता के उन अंधेरों में 4 मार्च को अचानक फ्लाइट की सूचना मिली, जिससे उनकी 'जान में जान' आई।
दिल्ली एयरपोर्ट पर छलके आंसू: "अब घर पर होगी ईश्वर की पूजा"
5 मार्च की शाम जब यह बुजुर्ग दंपती सुरक्षित दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अपने परिवार को सामने पाकर प्रेमपाल सिंह ने कहा,"50वीं सालगिरह की खुशियां तो हालात की भेंट चढ़ गईं, लेकिन सुरक्षित घर लौटना हमारे लिए किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है।" अब यह परिवार सुरक्षित घर पहुंच चुका है और इस 'संकट' से उबारने के लिए ईश्वर का आभार जताने हेतु विशेष पूजा-अर्चना की तैयारी कर रहा है।