UP News: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां अब पूरी तरह शुरू हो चुकी हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दल एक साल से अधिक समय बाकी रहते ही 'मिशन 2027' पर जोर-शोर से जुट गए हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की मजबूत प्रदर्शन के बाद बीजेपी और सपा दोनों ही इस बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज होने की रणनीति बना रहे हैं।
अखिलेश ने सांसदों को दिए चुनावी टास्क
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को लखनऊ में पार्टी के सभी 41 सांसदों (37 लोकसभा और 4 राज्यसभा) की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक में 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से मंथन हुआ। अखिलेश ने सांसदों से उनके संसदीय क्षेत्रों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी, जिसमें स्थानीय मुद्दे, संगठन की स्थिति और संभावित प्रत्याशियों पर चर्चा हुई। उन्होंने सांसदों को रिपोर्ट कार्ड सौंपते हुए नए टास्क दिए और जोर दिया कि 'यह 37 सांसद 2027 में 403 सीटों पर जीत दिलाएंगे'। बैठक में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मुद्दे पर भी फोकस रहा, साथ ही बीजेपी पर संविधान खतरे में डालने का आरोप लगाया गया।
भाजपा की संगठनात्मक सक्रियता बढी
अखिलेश ने साफ कहा कि सपा की सरकार बनकर जनता के लोकतांत्रिक अधिकार बहाल किए जाएंगे। पार्टी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूत करने पर जोर दे रही है।भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी लगातार सक्रिय है। पार्टी ने विभिन्न स्तरों पर बैठकें, संपर्क अभियान और मतदाता सूची में नए नाम जुड़वाने का अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास, कानून-व्यवस्था और हिंदुत्व को मुख्य मुद्दा बनाया जा रहा है। बीजेपी ने हाल ही में जाति-आधारित रैलियों पर रोक लगाने का फैसला लिया, जिसे विपक्षी दलों की रणनीति पर हमला माना जा रहा है।
माया ने जन्मदिन पर खेला ब्राह्मण कार्ड
पार्टी का फोकस पुराने कार्यकर्ताओं के घर-घर जाकर उन्हें सक्रिय करना और 2022 के प्रदर्शन से बेहतर परिणाम हासिल करना है।बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने स्पष्ट घोषणा की है कि पार्टी 2027 के चुनाव अकेले लड़ेगी, किसी गठबंधन में नहीं जाएगी। उन्होंने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा किया है। जन्मदिन पर ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए बसपा ने ब्राह्मण समुदाय को साधने की कोशिश की है। पार्टी अपनी पारंपरिक दलित-ब्राह्मण-मुस्लिम समीकरण को मजबूत करने पर फोकस कर रही है।
सपा से सीटों के मोलभाव में कांग्रेस
कांग्रेस भी मैदान में उतर आई है। पार्टी ने सभी 403 सीटों पर तैयारी शुरू कर दी है और सपा से सीट-बंटवारे में कड़ी मोलभाव की तैयारी में है। कांग्रेस ने दलितों को साधने के लिए 'संविधान पर चर्चा' अभियान शुरू किया है। विश्लेषकों का मानना है कि 2027 का यूपी चुनाव जातीय समीकरण, गठबंधन की राजनीति और विकास बनाम विभाजन के बीच होगा। लोकसभा में सपा-कांग्रेस की सफलता से विपक्ष उत्साहित है, लेकिन बीजेपी का संगठन और योगी का चेहरा अभी भी मजबूत है। एआईएमआईएम और अन्य छोटे दलों की सक्रियता भी मुस्लिम वोटों पर असर डाल सकती है। कुल मिलाकर, यूपी की सियासत में 'महाभारत' शुरू हो चुकी है और अगले साल तक यह और तेज होगी।