Election Commission Meeting Protocol : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन और चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग के बीच आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। चुनाव आयोग ने कहा कि उसे किसी भी राजनीतिक दल या उसके प्रतिनिधिमंडल से मिलने में कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, इसके लिए तय प्रक्रिया के तहत पहले मुलाकात का समय लेना जरूरी है। आयोग के मुताबिक, मंगलवार शाम चार बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने बैठक के लिए औपचारिक समय नहीं मांगा था।
मुलाकात को लेकर क्या है आयोग का नियम
चुनाव आयोग ने बताया कि राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए 2025 में एक निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल बनाया गया था। इसके तहत किसी दल या कई दलों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए पहले आयोग से मिलने का समय मांगना होता है। इसके बाद आपसी सहमति से बैठक की तारीख और समय तय किया जाता है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दल आगे भी इसी प्रक्रिया के तहत उससे मुलाकात कर सकते हैं।
240 सांसदों की बैठक पर क्यों नहीं बनी बात
आयोग के अनुसार, मंगलवार शाम करीब चार बजे दिल्ली पुलिस के जरिए उसे जानकारी मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन सौंपने के लिए आयोग से मिलना चाहता है। आयोग इस प्रस्ताव पर विचार कर ही रहा था कि उसे बताया गया कि करीब 240 सांसद संसद भवन की एनेक्सी में बैठक करना चाहते हैं। आयोग ने इस प्रस्ताव को अपने निर्धारित प्रोटोकॉल से अलग बताया, क्योंकि ऐसी बैठक आयोग के परिसर में होने की व्यवस्था
है।
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ज्ञापन लेने के लिए भेजना चाहता था अधिकारी
चुनाव आयोग ने कहा कि मामले को देखते हुए उसने एक वैकल्पिक व्यवस्था भी सुझाई थी। इसके तहत आयोग का सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी संसद भवन की एनेक्सी में जाकर सांसदों से ज्ञापन ले सकता था। आयोग के मुताबिक, सांसदों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने दोहराया कि राजनीतिक दलों से संवाद का रास्ता खुला है और तय प्रक्रिया के तहत कोई भी दल बैठक के लिए अनुरोध कर सकता है।
आकाशवाणी भवन में धरने से बढ़ा विवाद
इससे पहले राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च कर रहे थे। पुलिस द्वारा रास्ता रोके जाने के बाद कुछ विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए। राहुल और प्रियंका समेत कई नेताओं को बाद में पुलिस ने हिरासत में लिया और उन्हें कुछ समय बाद रिहा कर दिया गया। विपक्ष का कहना था कि वह चुनाव आयोग से सीधे मिलकर मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े सवाल उठाना चाहता है। दूसरी ओर, आयोग ने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों से मिलने के लिए तैयार है, बशर्ते निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए।