
Election Commission vs Rahul Gandhi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा लखनऊ और वाराणसी में फर्जी वोटर लिस्ट को लेकर किए गए दावों पर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब तक कांग्रेस या राहुल गांधी की ओर से एफिडेविट को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसी बीच चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए राहुल गांधी को खुली चुनौती दी है कि वे या तो अपने आरोपों को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करें या फिर देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। मामला तेजी से राजनीतिक रंग ले रहा है।
चुनाव आयोग ने उठाए गंभीर सवाल
राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि लखनऊ और वाराणसी की मतदाता सूची में बड़ी संख्या में फर्जी नाम दर्ज हैं। उन्होंने कहा था कि चुनाव में धांधली की जा रही है और इससे लोकतंत्र को खतरा है। हालांकि जब आयोग ने इन दावों की जांच की तो उन्हें कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। अब चुनाव आयोग का कहना है कि बिना साक्ष्य के ऐसे गंभीर आरोप लगाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
तीन राज्यों के चुनाव आयोगों ने किया खंडन
कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और बिहार के चुनाव अधिकारियों ने भी राहुल गांधी के दावों को आधारहीन बताया है। अधिकारियों ने कहा है कि मतदाता सूची एक तय प्रक्रिया के तहत बनाई जाती है और उसमें किसी भी गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाती। आयोगों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को मतदाता सूची में त्रुटि मिलती है तो वह इसकी शिकायत करने के लिए अधिकृत प्रक्रिया अपना सकता है
कागज़ पर साइन या माफी – चुनाव आयोग की दो टूक
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को स्पष्ट संदेश दिया है – या तो वे अपने दावों को एफिडेविट के माध्यम से वैधता प्रदान करें, यानी कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करें, या फिर देश से माफी मांगें। आयोग का यह भी कहना है कि बार-बार बिना प्रमाण के बयान देना जनता को भ्रमित करता है और चुनावी प्रक्रिया की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
राजनीतिक गलियारों में मची हलचल
चुनाव आयोग की इस चुनौती के बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर कांग्रेस से जवाब मांग रहे हैं, वहीं सत्ताधारी दल इसे कांग्रेस की जिम्मेदारी बताकर राहुल गांधी को घेरने में जुट गया है। इस बीच, राहुल गांधी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं