भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने बिजली चोरी और बिल बकाया की वसूली को आसान बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब ‘बिजली थाने’ खोले जाएंगे, जहां बिजली चोरी, केबल चोरी और कर्मचारियों के साथ मारपीट जैसे मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज होगी। पहले चरण में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में थाने शुरू किए जाएंगे। इस कदम का उद्देश्य बिजली चोरी पर रोक लगाना और वसूली की प्रक्रिया को तेज करना है।
गुजरात मॉडल पर होंगे थाने
बिजली थानों की रूपरेखा गुजरात मॉडल पर तैयार की जा रही है। इसके लिए हाल ही में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और बिजली कंपनी के प्रतिनिधियों ने गुजरात का दौरा भी किया था। यहां पर पुलिसकर्मी विशेष रूप से बिजली से जुड़े अपराधों की जांच करेंगे।
किन शहरों में खुलेंगे पहले थाने
पहले चरण में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में एक-एक थाना खोला जाएगा। इंदौर के पोलोग्राउंड और उज्जैन के ज्योतिनगर मुख्यालय में थाने के लिए जगह तय भी कर ली गई है। आने वाले महीनों में अन्य जिलों में भी विस्तार किया जा सकता है।
बिजली कंपनियों को मिलेगी सीधी ताकत
इन थानों के बाद बिजली चोरी या बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस की मदद लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। थानों में लगभग 10 लोगों का स्टाफ होगा, जिसमें टीआई, एएसआई, पुलिसकर्मी और कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल रहेंगे। साथ ही 50% महिला और 50% पुरुष स्टाफ रखने की योजना है।
खर्च और उद्देश्य
एक बिजली थाना बनाने पर करीब 25–30 लाख रुपये खर्च होंगे। मुख्य उद्देश्य है—बिजली चोरी रोकना, बकाया वसूलना और बिजली कर्मचारियों पर होने वाले हमलों को कम करना।