बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में इन दिनों एक अनोखा और बेहद अहम काम चल रहा है। यहां जंगल में विचरण करने वाले हर जंगली हाथी को यूनिक पहचान दी जा रही है। हाथियों के यूनिक आईडी कार्ड बनाए जा रहे हैं, जिनमें उनकी शारीरिक विशेषताओं को रिकॉर्ड किया जा रहा है। यह कदम हाथियों की लोकेशन ट्रैकिंग और मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति में त्वरित पहचान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक 20 हाथियों की यूनिक आईडी तैयार की जा चुकी है और बाकी की प्रक्रिया जारी है।
हाथियों की यूनिक पहचान क्यों है जरूरी?
वन अधिकारियों के अनुसार जंगल में लगभग 40 से 50 जंगली हाथी हैं, जिनकी मूवमेंट मॉनिटर करना और किसी घटना की स्थिति में सटीक पहचान करना बेहद कठिन होता था। यही कारण है कि अब इन हाथियों की यूनिक पहचान तैयार की जा रही है। इससे ना केवल हाथी के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी बल्कि किसी विवाद या जनहानि की स्थिति में भी यह जानकारी कारगर साबित होगी।
पहचान
कैसे की जा रही
है?
हर हाथी की यूनिक आईडी बनाने के लिए उसके शरीर के विशिष्ट हिस्सों की तस्वीरें ली जा रही हैं। इसमें हाथी के दोनों कानों, माथे, टस्क (दांत), हम्प (पीठ की ऊंचाई), और पूंछ की स्थिति को रिकॉर्ड किया जा रहा है। ये सब पहलू मिलकर हर हाथी की एक अलग पहचान तय करते हैं। यह कार्य फील्ड स्टाफ, कैमरा ट्रैप और WRCS की टीम के सहयोग से किया जा रहा है।
तस्वीरें
लेने में हो रही
है दिक्कतें
जंगली हाथी किसी फॉर्मल फोटोशूट के लिए तो नहीं आते, इसलिए टीम को लगातार उनके मूवमेंट पर नजर रखनी पड़ती है। जैसे ही किसी वन क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलती है, ताला में मौजूद केंद्रीय टीम मौके पर पहुंच जाती है और हाथियों की पहचान के लिए तस्वीरें एकत्र करती है। कई बार कैमरा ट्रैप से अच्छी तस्वीरें नहीं मिलतीं, ऐसे में टीम को फील्ड में जाकर जोखिम उठाना पड़ता है।
अब तक 20 हाथियों की हो चुकी
पहचान
अब तक बांधवगढ़ में 20 जंगली हाथियों की यूनिक आईडी तैयार हो चुकी है। शेष हाथियों की पहचान की प्रक्रिया प्रगति पर है। सभी 9 वन परिक्षेत्रों में यह काम सक्रिय रूप से किया जा रहा है, जिसमें फॉरेस्ट गार्ड्स को लगातार सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
कहां
से आए बांधवगढ़ के
हाथी?
बांधवगढ़ में जंगली हाथियों की स्थायी उपस्थिति वर्ष 2018-19 के बाद शुरू हुई, जब झारखंड और छत्तीसगढ़ से एक बड़ा झुंड यहां पहुंचा। बेहतर जैव विविधता मिलने के कारण ये हाथी यहीं के हो गए और अब नियमित रूप से इनकी मूवमेंट देखी जा रही है।