पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट ने भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे हालात में भारत ने रणनीतिक कदम उठाते हुए समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया है। भारतीय नौसेना की बढ़ती तैनाती अब सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा को बचाने की तैयारी मानी जा रही है।
होर्मुज स्ट्रेट पर संकट, भारत की बढ़ी चौकसी
ईरान के आसपास बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। यह वही मार्ग है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से आता है, इसलिए यहां किसी भी रुकावट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
समंदर में उतरे सात भारतीय युद्धपोत
स्थिति को देखते हुए भारत ने अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अपनी नौसेना की ताकत बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक करीब सात युद्धपोत और लॉजिस्टिक सपोर्ट वेसल्स तैनात किए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य भारतीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देना है।
ऑपरेशन संकल्प बना सुरक्षा कवच
2019 से चल रहे ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत भारतीय नौसेना पहले से ही इस क्षेत्र में सक्रिय है। अब मौजूदा संकट को देखते हुए इस मिशन को और मजबूत किया गया है। नौसेना न सिर्फ तेल और गैस लेकर आने वाले जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है, बल्कि फारस की खाड़ी के करीब अपनी मौजूदगी भी बनाए हुए है।
20 से ज्यादा भारतीय जहाज अब भी फंसे
मौजूदा हालात में 20 से अधिक भारतीय जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं। इनमें एलपीजी से जुड़े जहाज भी शामिल हैं। नौसेना पहले ही कुछ जहाजों को सुरक्षित भारतीय बंदरगाह तक पहुंचा चुकी है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
महंगे विकल्पों की ओर बढ़ सकता है भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा चलता है तो भारत को रूस, अमेरिका या वेनेजुएला जैसे देशों से तेल मंगाना पड़ सकता है। हालांकि इन विकल्पों की लागत ज्यादा होगी। खाड़ी क्षेत्र से मिलने वाला तेल अपेक्षाकृत सस्ता होता है, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था भारत की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
हर स्थिति के लिए हाई अलर्ट पर नौसेना
भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए भारतीय नौसेना पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जरूरत पड़ने पर फारस की खाड़ी में प्रवेश करने और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव रणनीति तैयार की जा रही है। यह तैनाती सिर्फ वर्तमान संकट नहीं, बल्कि आने वाले समय की चुनौतियों से निपटने की तैयारी भी है।