UP News: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा वर्ष 2018 में आयोजित ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ), समाज कल्याण पर्यवेक्षक एवं ग्राम पंचायत अधिकारी की कुल 1953 पदों की भर्ती परीक्षा में हुई धांधली के मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने सात और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें छह अभ्यर्थी और एक निजी कंपनी 'एसआरएन डाटा क्रिएट सिस्टम प्रा. लि.' का कर्मचारी शामिल है। जांच में पता चला कि कंपनी के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया संचालित की गई थी और इसमें अनियमितताओं के जरिए चयन कराने की कोशिश की गई।
आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया
सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत चलाए गए विशेष अभियान 'ऑपरेशन शिकंजा' के अंतर्गत की गई। ईओडब्ल्यू ने 5 से 11 जनवरी तक सात दिनों में कुल 28 फरार आर्थिक अभियुक्तों को विभिन्न जिलों और दिल्ली से धर दबोचा। इसमें 2018 की यूपीएसएसएससी भर्ती से जुड़े सात आरोपी प्रमुख हैं। गिरफ्तार आरोपियों में अभ्यर्थी अरुण कुमार, कर्मवीर, अंकुश यादव, अमर सिंह, उमेश चंद्र, अमन कुमार और उमेश पाल शामिल हैं। इनके अलावा निजी कंपनी का कर्मचारी, जो असिस्टेंट प्रोग्रामर/प्रभारी स्कैनर के पद पर था, भी पकड़ा गया।
कुल आठ टीमें गठित की थीं
ईओडब्ल्यू ने मुख्यालय और सेक्टर स्तर पर कुल आठ टीमें गठित की थीं, जिन्हें सेंट्रल क्रैक टीम का भी सहयोग मिला। अभियान के दौरान छापेमारी और धरपकड़ में कई जिलों से फरार आरोपी पकड़े गए। यह मामला 2018 में टीसीएस लिमिटेड के माध्यम से आयोजित परीक्षा से जुड़ा है, जहां पेपर लीक, नकल और अनुचित साधनों के इस्तेमाल के आरोप लगे थे।ईओडब्ल्यू के अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार अभ्यर्थियों ने अनुचित तरीके से लाभ उठाया, जबकि कंपनी कर्मचारी ने डेटा हैंडलिंग में गड़बड़ी की।
जांच में मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य मिले
जांच में मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य मिले हैं। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की सख्त नीति का हिस्सा है, जिसके तहत परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं।मामले की जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।