Epang Opang Jhapang: पश्चिम बंगाल में सरकारी सहायता प्राप्त पुस्तकालयों में रखी जाने वाली पुस्तकों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राज्य के पुस्तकालय मंत्री गौरीशंकर घोष ने संकेत दिया है कि ऐसी किताबों को हटाया जाएगा, जो पाठकों के ज्ञान और बौद्धिक विकास में विशेष योगदान नहीं देतीं। उनके बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चर्चित पुस्तक ‘एपांग ओपांग झपांग’ एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है।
ज्ञानवर्धक पुस्तकों पर रहेगा जोर
मंत्री गौरीशंकर घोष ने कहा कि पुस्तकालयों का उद्देश्य लोगों को ज्ञान और संस्कार प्रदान करना है। इसलिए वहां ऐसी ही पुस्तकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो पाठकों, विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के व्यक्तित्व विकास में सहायक हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुस्तकालयों में उपलब्ध सामग्री की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कुछ पुस्तकों को हटाया भी जा सकता है।
ममता बनर्जी की किताब पर बढ़ा विवाद
मंत्री के बयान को ममता बनर्जी की पुस्तक ‘एपांग ओपांग झपांग’ से जोड़कर देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने स्कूल पुस्तकालयों के लिए जारी सूची में ममता बनर्जी की कई पुस्तकों को शामिल किया था। उस समय विद्यालयों को पुस्तक खरीदने के लिए विशेष वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई थी। अब नई सरकार के रुख के बाद इन पुस्तकों के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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क्या है ‘एपांग ओपांग झपांग’ का मतलब?
‘एपांग ओपांग झपांग’ मूल रूप से एक विज्ञापन में इस्तेमाल किया गया जिंगल था, जिसका कोई स्पष्ट शब्दार्थ नहीं माना जाता। बाद में यह ममता बनर्जी की एक कविता के कारण चर्चित हुआ और राजनीतिक बहस का विषय बन गया। साहित्य में ऐसी रचनाओं को अक्सर ‘नॉनसेंस पोएम’ यानी अर्थहीन या कल्पनात्मक कविता की श्रेणी में रखा जाता है। बंगाली साहित्य में इस शैली का प्रयोग पहले भी कई लेखकों द्वारा किया जा चुका है।
महान साहित्यकारों की रचनाओं को प्राथमिकता
गौरीशंकर घोष ने कहा कि पुस्तकालयों में ऐसी पुस्तकों को महत्व दिया जाएगा जो समाज, संस्कृति और इतिहास की समझ को मजबूत करें। उन्होंने रवींद्रनाथ ठाकुर, काजी नजरुल इस्लाम, स्वामी विवेकानंद, छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप जैसी महान हस्तियों की रचनाओं और जीवनियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाठकों को प्रेरणादायक साहित्य उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होगी। मंत्री के बयान के बाद राज्य में साहित्य और राजनीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।