कर्मचारी भविष्य निधि संगठन Employees' Provident Fund Organisation ने कर्मचारियों के हित में एक अहम और लंबे समय से जरूरी बदलाव किया है। अब नौकरी बदलते समय वीकेंड या छुट्टियों की वजह से इंश्योरेंस क्लेम नहीं रुकेगा। इस फैसले से उन कर्मचारियों के परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा, जिनका क्लेम सिर्फ तकनीकी कारणों से खारिज हो जाता था। दिसंबर 2025 में जारी सर्कुलर के जरिए ईपीएफओ ने एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम के नियमों को और ज्यादा मानवीय और व्यावहारिक बना दिया है। यह फैसला लाखों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है।
वीकेंड को अब सर्विस ब्रेक नहीं माना जाएगा
पुराने नियमों में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि अगर कोई कर्मचारी शुक्रवार को पुरानी नौकरी छोड़ता और सोमवार को नई कंपनी जॉइन करता था, तो शनिवार और रविवार को सर्विस में ब्रेक मान लिया जाता था। इसी तकनीकी ब्रेक की वजह से ईडीएलआई जैसी स्कीम के तहत मिलने वाला इंश्योरेंस क्लेम परिवार को नहीं मिल पाता था। नए नियमों में ईपीएफओ ने साफ कर दिया है कि नौकरी बदलते समय आने वाली साप्ताहिक छुट्टियां अब सर्विस ब्रेक नहीं मानी जाएंगी। इसका मतलब यह है कि कर्मचारी की सेवा को लगातार माना जाएगा और परिवार को बीमा लाभ से वंचित नहीं होना पड़ेगा।
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राष्ट्रीय और राज्य अवकाश भी नियम में शामिल
ईपीएफओ के नए निर्देशों में सिर्फ वीकेंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अवकाश और राज्य सरकार द्वारा घोषित छुट्टियों को भी शामिल किया गया है। अगर नौकरी बदलने के दौरान इन छुट्टियों के कारण बीच में गैप आता है, तो भी इसे सर्विस ब्रेक नहीं माना जाएगा। इससे उन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, जो बेहतर अवसर के लिए नौकरी बदलते हैं। अब सिर्फ कैलेंडर की तारीखों के कारण किसी परिवार का बीमा क्लेम अटकने का खतरा नहीं रहेगा। यह बदलाव कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करता है।
ईडीएलआई में न्यूनतम 50 हजार की गारंटी
ईपीएफओ ने ईडीएलआई स्कीम के तहत मिलने वाले न्यूनतम इंश्योरेंस पेआउट को भी बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया है। पहले जिन कर्मचारियों का औसत पीएफ बैलेंस कम होता था, उनके परिवार को कम राशि मिलती थी। अब अगर किसी कर्मचारी का पीएफ बैलेंस 50 हजार रुपये से कम भी है, तब भी उसके परिवार को कम से कम 50 हजार रुपये की बीमा राशि मिलेगी। यह फैसला उन परिवारों के लिए बड़ी सुरक्षा कवच साबित होगा, जो पहले कम बैलेंस की वजह से नुकसान झेलते थे। कुल मिलाकर ईपीएफओ का यह कदम कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद बदलाव माना जा रहा है।