कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) एक बड़े परिवर्तन की तैयारी में है। खबर है कि EPFO अनिवार्य PF और पेंशन योगदान के लिए वेतन सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। मौजूदा वेतन सीमा ₹15,000 है, लेकिन इसे बढ़ाकर ₹25,000 करने का प्रस्ताव रखा गया है। पहले यह सीमा ₹6,500 थी, जिसे बाद में ₹15,000 किया गया था। अब फिर एक दशक बाद इस सीमा को अपडेट करने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकार और EPFO का मानना है कि लाखों कर्मचारी आज भी सिर्फ इसलिए पेंशन और PF सुरक्षा से बाहर हैं, क्योंकि उनकी बेसिक सैलरी इस सीमा से कुछ ही ज्यादा है।
कर्मचारियों को पेंशन कवरेज नहीं मिल पाता
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने मुंबई में कहा कि यह चिंता का विषय है कि ₹15,000 से थोड़ा अधिक कमाने वाले कर्मचारियों को पेंशन कवरेज नहीं मिल पाता और बुढ़ापे में उन्हें अपने परिवार पर ही निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरानी सीमा को अपडेट करना समय की मांग है। रिपोर्ट्स के अनुसार, EPFO इस प्रस्ताव को केंद्रीय न्यासी बोर्ड की अगली बैठक में भेज सकता है और अगले साल की शुरुआत में इस पर अंतिम फैसला संभव है।
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1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी EPF-EPS के दायरे में
मौजूदा नियमों के अनुसार, केवल वे कर्मचारी जिनकी बेसिक सैलरी ₹15,000 या उससे कम है, वे EPF और EPS में स्वतः शामिल होते हैं। इससे 15,000 रुपये से थोड़ी ज्यादा कमाने वाले लाखों कर्मचारी PF और पेंशन जैसी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं, जबकि उनकी जरूरत उतनी ही होती है। यही वजह है कि ट्रेड यूनियनें सालों से इस सीमा को बढ़ाने की मांग कर रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, यदि वेतन सीमा ₹25,000 की जाती है, तो 1 करोड़ से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी EPF-EPS के दायरे में आ जाएंगे।
कर्मचारियों के लिए PF में योगदान
अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो कर्मचारियों के लिए PF में योगदान बढ़ेगा, EPFO का फंड मजबूत होगा और पेंशन भुगतान क्षमता में भी सुधार आएगा। फिलहाल कर्मचारी बेसिक सैलरी का 12% PF में जमा करते हैं और नियोक्ता भी उतना ही योगदान करता है, जिसमें से एक हिस्सा EPS में जाता है। सैलरी बेस बढ़ने से दोनों का योगदान बढ़ेगा, जिससे भविष्य में बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनेगा। हालांकि नियोक्ताओं पर प्रति कर्मचारी लागत बढ़ेगी। EPFO पहले ही कई सुधार कर चुका है, जिसमें PF निकालने की अवधि को 2 महीनों से बढ़ाकर 12 महीने करना शामिल है।