केंद्र सरकार ने E22 से E30 तक के एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी हटाने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना और देश की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है। फैसले के बाद पेट्रोल सस्ता होने की चर्चा तेज हो गई है, लेकिन फिलहाल आम उपभोक्ताओं को तुरंत राहत मिलने की संभावना नहीं है।
तुरंत नहीं घटेंगे पेट्रोल के दाम
सरकार की ओर से दी गई यह छूट सीधे ग्राहकों को नहीं बल्कि तेल कंपनियों और ईंधन उत्पादकों को मिलेगी। इसलिए पेट्रोल पंप पर अभी कीमतों में सीधी कमी देखने को नहीं मिलेगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में एथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने पर पेट्रोल की लागत कम हो सकती है।
क्या है एथेनॉल का फायदा?
एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। यह पूरी तरह देश में उत्पादित होता है, इसलिए इसके लिए विदेशी तेल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वर्ष 2014 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण सिर्फ 1.5 प्रतिशत था, जो अब कई क्षेत्रों में 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। सरकार अब E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च मिश्रण वाले ईंधन को बढ़ावा देना चाहती है।
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20 रुपये सस्ता ईंधन कैसे?
हाल ही में लॉन्च किए गए E85 ईंधन की कीमत दिल्ली में करीब 82 रुपये प्रति लीटर रखी गई, जबकि सामान्य पेट्रोल लगभग 102 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। यानी दोनों के बीच करीब 20 रुपये प्रति लीटर का अंतर है। हालांकि वर्तमान में अधिकांश वाहन E85 जैसे ईंधन के अनुकूल नहीं हैं, इसलिए इसका लाभ सीमित है।
किसानों और देश दोनों को फायदा
एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों और चीनी उद्योग को भी लाभ मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 1700 करोड़ लीटर सालाना से अधिक हो चुकी है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
भविष्य में मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन तेजी से बाजार में आते हैं और एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग बढ़ता है, तो भारत की तेल आयात पर निर्भरता घटेगी। इससे वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम होगा और लंबे समय में पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। फिलहाल पेट्रोल सस्ता नहीं हुआ है, लेकिन सरकार का यह कदम भविष्य में ईंधन लागत घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।