Green Vehicle Life : देश में इलेक्ट्रिक, CNG और हाइड्रोजन वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है। प्रस्ताव के मुताबिक, इलेक्ट्रिक, CNG और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों की ऑपरेशनल लाइफ पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में 5 साल तक बढ़ाई जा सकती है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो लाखों वाहन मालिकों और परिवहन कारोबारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
कमर्शियल वाहन मालिकों को होगा सबसे बड़ा लाभ
सरकार के इस प्रस्ताव का सबसे ज्यादा असर कमर्शियल वाहन मालिकों और फ्लीट ऑपरेटरों पर पड़ सकता है। मौजूदा व्यवस्था में तय अवधि पूरी होने के बाद वाहन बदलना पड़ता है, जिससे बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने पर वाहन मालिक एक ही गाड़ी से ज्यादा समय तक कमाई कर सकेंगे। इससे वाहन बदलने की लागत कम होगी और कारोबारियों को राहत मिलेगी।
रीसेल वैल्यू और लागत पर भी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन वाहनों की उम्र बढ़ने से उनकी रीसेल वैल्यू में भी इजाफा हो सकता है। साथ ही वाहन की कुल लागत भी कम महसूस होगी क्योंकि उसे लंबे समय तक उपयोग किया जा सकेगा। सरकार पहले से ही स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है और यह प्रस्ताव उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
नेशनल परमिट प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल
ड्राफ्ट में सिर्फ वाहनों की उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि कमर्शियल वाहनों के लिए जरूरी नेशनल परमिट प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी है। इसके तहत आवेदन, मंजूरी और अन्य औपचारिकताएं ऑनलाइन की जा सकेंगी। इससे परिवहन कारोबारियों का समय बचेगा और कागजी प्रक्रिया में कमी आएगी। वाहन जल्दी सड़क पर उतर सकेंगे, जिससे कारोबार की रफ्तार बढ़ेगी।
ऑटो कंपोनेंट उद्योग को भी मिलेगा फायदा
सरकार ने ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों को ट्रेड सर्टिफिकेट व्यवस्था में शामिल करने का प्रस्ताव भी दिया है। इससे ऑटो पार्ट्स की टेस्टिंग, ट्रांसपोर्ट और प्रमाणन प्रक्रिया आसान हो सकेगी। माना जा रहा है कि इससे भारत के ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग को भी मजबूती मिलेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
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अभी अंतिम फैसला बाकी
हालांकि यह बदलाव अभी सिर्फ प्रस्ताव के स्तर पर है। मंत्रालय ने ड्राफ्ट जारी कर उद्योग और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद ही अंतिम नियम लागू किए जाएंगे। लेकिन यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो EV, CNG और हाइड्रोजन वाहनों के लिए यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी राहत साबित हो सकती है और देश में ग्रीन मोबिलिटी को नई रफ्तार मिल सकती है।