UP News: कुपोषण बच्चों के लिए एक बड़ी चुनौती है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में। यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को रोकता है, जिससे वे कमजोर हो जाते हैं, बीमार पड़ते हैं और पढ़ाई-लिखाई में पिछड़ जाते हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस समस्या से लड़ रही हैं। बावजूद इसके यूपी में करीब 20-25 लाख बच्चे कुपोषण से प्रभावित हैं। हर दूसरा बच्चा कुपोषित है। यह भारत में सबसे ज्यादा है।
यूपी में कुपोषितों की सबसे ज्यादा तादाद
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है, जहां करीब 85 लाख बच्चे 18 साल से कम उम्र के हैं। कुपोषण का मतलब है कि बच्चे का वजन, लंबाई या शरीर का विकास उम्र के हिसाब से कम होना जैसे स्टंटिंग-बौनापन, वेस्टिंग-कमजोरी, या अंडरवेट-कम वजन। 2024 तक 6 साल से कम उम्र के बच्चों में 46 परसेंट स्टंटेड बौनापन पाया गया। यह भारत में सबसे ज्यादा तादाद है।17 परसेंट अंडरवेट से करीब 7-8 लाख बच्चे, 6 परसेंट वेस्टेड 2-3 लाख बच्चे, गंभीर रूप से कुपोषित 1.86 लाख बच्चे हैं। ये आंकडे NFHS-5, 2019-21 और 2024-25 की सरकारी डेटा पर आधारित हैं।
2015-16 में 50 परसेंट से ज्यादा था कुपोषण
पहले (2015-16) में कुपोषण की यह तादाद 50 परसेंट से ज्यादा थी। लेकिन अब थोड़ा सुधार हो रहा है। फिर भी, यूपी में हर दूसरा बच्चा कुपोषित है, जो चिंता की बात है। ग्रामीण इलाकों और गरीब परिवारों में यह ज्यादा है। सरकार कुपोषित बच्चों को सीधे पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल देती है। आंगनवाड़ी केंद्रों पर मुफ्त भोजन की व्यवस्था है, जहां 0-6 साल के बच्चों को रोजाना 500 कैलोरी और 12-15 ग्राम प्रोटीन वाला सप्लीमेंट्री फूड (जैसे दाल, अनाज, दूध पाउडर से बना मिक्स) मिलता है। गंभीर कुपोषित बच्चों को दोगुना (800 कैलोरी) पोषण दिया जाता है। यह 300 दिन चलता है। यूपी में 1.89 लाख एंगनवाड़ी केंद्र हैं, जो 2 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को मदद देते हैं।
मुख्यमंत्री कुपोषण मुक्ति अभियान
जानकारी के अनुसार यूनिसेफ भी यूपी सरकार के साथ मिलकर काम करता है। योगी सरकार ने 2017 से कुपोषण को प्राथमिकता दी है। 2020-25 में एनएफएचएस के डेटा के मुताबिक स्टंटिंग 6.6 परसेंट और अंडरवेट 7.4 परसेंट कम हुआ। मुख्यमंत्री कुपोषण मुक्ति अभियान 2023 से शुरू किया गया। इसमें 100 परसेंट कुपोषण खत्म करने का लक्ष्य तया किया गया। 897 पोषण प्रोजेक्ट चलाए, जिसमें महिलाओं के स्वयं सहायता समूह आंगनवाड़ी में पौष्टिक भोजन बनाते हैं। 1,359 नए एंगनवाड़ी केंद्र और 171 बाल विकास कार्यालय बनाए गए। 2025 से 3-6 साल के 11 लाख बच्चों को रोज 400 कैलोरी का नाश्ता दिया जाना शुरू हुआ। पहले 8 जिलों में, अब पूरे 75 जिलों में दिया जा रहा है।
कुपोषण के विपरीत सुपोषण योजना
इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए 2025-26 बजट में 4,119 करोड़ रूपए दिए गए । सीएम सशक्त सुपोषण योजना के लिए 100 करोड़ रूपए दिए गए । आईसीडीएस और पोषण अभियान से यूपी को केंद्र से करीब 12,000 करोड़ मिले I प्रदेश सरकार ने कुपोषण के लिए अतिरिक्त 1,000-2,000 करोड़ सालाना जोड़े। वहीं प्रयास यह भी है कि सुपोषण योजना से बच्चे स्वस्थ बचपन पाएं, ताकि स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करें। एसएचजी से महिलाओं को रोजगार देकर परिवार मजबूत करने का प्रयास भी किया जा रहा है।