भारत–बांग्लादेश रिश्तों में चल रही तल्खी के बीच पड़ोसी देश के पूर्व ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्लाहिल अमान आजमी ने ऐसा बयान दिया जिसने आग में घी डालने का काम कर दिया। ऑनलाइन चर्चा के दौरान आजमी ने दावा किया कि बांग्लादेश में तब तक शांति नहीं आ सकती जब तक भारत “टुकड़ों में” नहीं बंट जाता। उनका कहना था कि भारत लगातार बांग्लादेश के अंदर अशांति फैलाता रहता है। बयान सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
भारत पर लगाए ऐतिहासिक आरोप
अमान आजमी ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए भारत पर 1975 से 1996 तक चटगांव हिल ट्रैक्ट्स क्षेत्र में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उस समय बनाई गई PCJSS संगठन और उसकी आर्म्ड विंग शांति वाहिनी को भारत से मदद मिली थी। आजमी के अनुसार, हथियार और ट्रेनिंग की सहायता के चलते पहाड़ी इलाकों में लंबे समय तक खूनखराबा चला। आजमी के ये दावे पुराने विवादों को फिर से हवा देते हुए दिखाई दे रहे हैं।
परिवार का विवादित इतिहास और बयानबाजी का पैटर्न
आजमी कोई नए विवादकर्ता नहीं हैं। उनके पिता गुलाम आजम जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख रह चुके हैं और उन पर 1971 के युद्ध में हिंदुओं और मुक्ति समर्थक बंगालियों के नरसंहार में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं। खुद आजमी भी पहले कई बार भारत के खिलाफ उत्तेजक टिप्पणियां कर चुके हैं और सोशल मीडिया पर भड़काऊ बयानबाजी के लिए चर्चाओं में रहे हैं। ऐसे में उनका ताजा बयान बांग्लादेश की घरेलू राजनीति और कट्टरपंथी समूहों के एजेंडे से जुड़ा माना जा रहा है।
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ऐसे समय पर बयान क्यों, क्या है राजनीतिक संकेत
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह बयान ऐसे समय पर क्यों दिया गया जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिर चुकी है और देश में इस्लामी कट्टरपंथी खुलेआम उग्र गतिविधियां चला रहे हैं। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस भी कार्रवाई करने के बजाय चुप दिखाई दे रहे हैं। इस माहौल में पूर्व जनरल की यह टिप्पणी भारत–बांग्लादेश संबंधों को और तनावपूर्ण बना देती है। विशेषज्ञ इसे राजनीतिक अस्थिरता और चरमपंथी दबाव का नतीजा मान रहे हैं, जो आने वाले दिनों में कूटनीतिक मुश्किलें बढ़ा सकता है।