आज की डिजिटल दुनिया में ऑनलाइन ठगी तेजी से फैल रही है और अब इसके शिकार सिर्फ आम लोग नहीं रह गए हैं। पंजाब से सामने आए मामले में पूर्व आईपीएस और रिटायर्ड आईजी अमर सिंह चहल भी स्कैमर्स के जाल में फंस गए। ठगों ने उन्हें ऑनलाइन निवेश और ज्यादा मुनाफे का लालच दिया। शुरुआत में छोटी रकम लगवाई गई और मुनाफा दिखाकर भरोसा जीता गया। यही तरीका सबसे खतरनाक होता है, क्योंकि इससे व्यक्ति खुद को सुरक्षित समझने लगता है।
भरोसे के बाद बढ़ती ठगी
जब भरोसा बन गया तो स्कैमर्स ने नए-नए बहाने बनाकर पैसे मांगने शुरू किए। कभी टैक्स प्रोसेसिंग फीस, कभी अकाउंट अनब्लॉक चार्ज तो कभी तकनीकी कारण बताए गए। हर बार नई वजह के साथ रकम बढ़ती चली गई। धीरे-धीरे ठगी की कुल राशि करीब 8.10 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। जब अमर सिंह चहल ने पैसे वापस मांगे तो ठगों ने संपर्क पूरी तरह खत्म कर दिया, जिससे उन्हें ठगे जाने का एहसास हुआ।
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मानसिक दबाव ने तोड़ दिया
इस भारी आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ता चला गया। धोखे का अहसास, परिवार की चिंता और सामाजिक बदनामी का डर उन पर हावी हो गया। सुसाइड नोट में उन्होंने साफ लिखा कि मानसिक दबाव उनके लिए असहनीय हो गया था। सोमवार को पटियाला स्थित आवास पर उन्होंने खुद को गोली मार ली। फिलहाल उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। यह घटना दिखाती है कि साइबर ठगी सिर्फ पैसे ही नहीं, बल्कि मानसिक सेहत भी तबाह कर देती है।
ऐसे स्कैम से कैसे बचें
साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। कोई भी स्कीम अगर ज्यादा रिटर्न का वादा करे तो उससे दूरी बनाएं। अनजान कॉल, मैसेज और लिंक पर भरोसा न करें। कभी भी फोन पर अपनी निजी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें। निवेश से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें। याद रखें, थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान और मानसिक परेशानी से बचा सकती है।