Exclusive Interview CM Rekha Gupta: देश की राजधानी में 27 साल का वनवास काटकर लौटी भाजपा की रेखा सरकार का एक साल का कार्यकाल फरवरी में पूरा होने जा रहा है। इस एक साल में दिल्ली और दिल्लीवासियों के जीवन में क्या मूलभूत बदलाव आया। पूर्व की सरकार और मौजूदा रेखा सरकार की नीतियों और नीयत में क्या फर्क रहा है। शहर, गांव और अनधिकृत कॉलोनियों समेत दिल्ली की तमाम ज्वलंत समस्याओं को लेकर रेखा सरकार क्या कदम उठा रही है। सरकार की आगामी वर्षों में दिल्ली के विकास को लेकर क्या योजनाएं रहेंगी। विकसित भारत-2047 में सरकार किन प्राथमिकताओं पर काम कर रही है। 27 साल बाद मिली सत्ता और चुनौतियों को लेकर सरकार चुनावी वादों पर कितनी खरी उतरी है। ऐसे ही तमाम ज्वलंत मुद्दों को लेकर ‘लोकसत्य’ के समूह संपादक राहुल शर्मा, वरिष्ठ संवाददाता दिनेश वत्स और मदनलाल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से विस्तार से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने विभिन्न प्रश्नों के बेबाकी से जवाब दिए।
एक साल में रखी विकास की नई नीव
देश की राजधानी पिछले 11 साल से बदहाल अवस्था में थी। हमने महज एक साल से भी कम समय में दिल्ली के हर क्षेत्र में विकास किया है। बिजली-पानी, सड़क, प्रदूषण, यमुना को स्वच्छ और निर्मल करना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सार्वजनिक परिवहन, जन स्वास्थ्य और शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में बेहतर सुधार किया है। आने वाले साल में देश की राजधानी का नक्शा पूरी तरह से बदला हुआ नजर आएगा। पिछली सरकार ने दिल्ली के विकास को लेकर कोई काम नहीं किया। दिल्ली की समस्याएं हमें विरासत में मिली हैं। हम इन समस्याओं को किसी पर थोपने या फिर इनसे भागने वाले नहीं हैं। हम दिल्ली की समस्याओं को पूरी तरह से खत्म करेंगे।
यमुना हमारी आस्था और संस्कृति
यमुना कोई राजनीति का मुद्दा नहीं है। यमुना हमारी आस्था और संस्कृति से जुड़ी हुई है। यमुना हमारी मां है। आने वाले दिनों में यमुना नदी का रूप पूरी तरह से बदला हुआ नजर आएगा। सरकार यमुना को लेकर वैज्ञानिक योजना, तय समय सीमा और अंतरराज्यीय तालमेल से बदलने में जुटी हुई है। सरकार ने वर्ष 2028 यमुना पुनर्जीवन मिशन को लागू कर दिया है। सरकार यमुना नदी को पूरी तरह से निर्मल और स्वच्छ बनाने के लिए 1799 अनधिकृत कॉलोनियों और जेजे कलस्टर को सीवर से जोड़ने, औद्योगिक क्षेत्रों में सीवेज टीट्रमेंट प्लांट की क्षमता को दुरुस्त करने, बड़े नालों की ड्रोन मैपिंग, नालों की निगरानी के लिए विशेष सिस्टम सहित कई बहुआयामी अभियान चला रही है। सरकार द्वारा नालों की नियमित सफाई, नई ट्रंक ड्रेनों का निर्माण और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स परियोजनाओं को समानांतर रूप से लागू किया जा रहा है ताकि भविष्य में यमुना में केवल साफ जल प्रवाहित हो। हमारी सरकार ने यमुना की साफ सफाई के लिए बजट को संशोधित करते हुए इस मद में 280 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है। इस साल सरकार 280 करोड़ रूपये से यमुना को क्लीन करने में जुटी हुई है।
जल्द ही क्रूज की सवारी करेंगे दिल्लीवासी
सोनिया विहार से जगतपुर के बीच पहले फेज में क्रूज की शुरूआत की जाएगी। क्रूज लगभग बनकर तैयार हो चुका है। जल्द ही दिल्लीवासी यमुना में क्रूज की सवारी कर पाएंगे। जहां तक यमुना के पूरे हिस्से में क्रूज चलाने की बात है तो सरकार ठोस यमुना एक्शन पुनर्जीवन प्लान के तहत कार्य कर रही है। यमुना नदी की गाद वर्षों से नहीं निकाली गई है। हमारी सरकार यमुना की गाद को निकाल कर इसे स्वच्छ और पूरी तरह से निर्मल करेगी। इसके बाद यमुना के पूरे हिस्से में क्रूज की सवारी की जा सकेगी। पहले फेज में सोनिया विहार से जगतपुर के बीच क्रूज चलाया जाएगा।
हमारे पास दिल्ली के विकास का बड़ा विजन
यमुना को साफ करने के अलावा, उसके जलस्तर को बढ़ाए रखने के लिए हरियाणा सरकार से भी बातचीत की जा चुकी है। यमुना नदी को भरपूर पानी मिलेगा, जिससे न केवल दिल्ली की प्यास बुझेगी बल्कि क्रूज से पर्यटन बढ़ाकर सरकार राजस्व भी बढ़ाएगी और यमुना का मान भी। सरकार ने यमुना और क्रूज के संचालन को लेकर पूरी तैयारी की है। टेरी ने यमुना में माइक्रोप्लास्टिक, फोमिंग और केमिकल प्रदूषण पर अपने प्रमुख निष्कर्ष और दिल्ली के लिए डिपार्टमेंट वाइज एक्शन प्लान पेश किया। दिल्ली में यमुना और उससे जुड़े बड़े नालों से करीब 100 सैंपल इकट्ठा कर उनका विश्लेषण किया गया, ताकि मौसम और जगह के हिसाब से प्रदूषण के पैटर्न को समझा जा सके। सभी विभागों को टेरी की सिफारिशों का अध्ययन कर वैज्ञानिक और टेक्नोलॉजी आधारित उपायों को तय समय में लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
100 अटल कैंटीन की ऐतिहासिक शुरुआत
यह पहल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों से प्रेरित है, जिनका उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना था। भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर 100 अटल कैंटीन की ऐतिहासिक शुरुआत की गई है। अटल कैंटीन में नाममात्र शुल्क 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का मानना है कि अटल कैंटीन केवल भोजनालय नहीं हैं, बल्कि दिल्ली के निर्माण और संचालन में जुटे मेहनतकश भाइयों-बहनों के प्रति सरकार की ओर से सम्मान और सहारा देने की एक संवेदनशील पहल है। अटल कैंटीन में प्रतिदिन दो समय भोजन परोसा जा रहा है। जहां दाल, चावल, रोटी और सब्ज़ी जैसे पौष्टिक व्यंजन जरूरतमंद और गरीबों को मिल पा रहे हैं। अटल कैंटीन में पकाए जाने वाले भोजन और कच्चे माल की गुणवत्ता की नियमित जांच एफएसएसएआई और एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं द्वारा की जाए रही है। जहां तक इस पर होने वाले खर्च का सवाल है, तो सरकार के लिए खर्चा मायने नहीं रखता है, बल्कि पौष्टिक भोजन मायने रखता है। सरकार जल्द ही इस योजना में गैर सरकारी संगठनों को जोड़ने जा रही है।
क्वालिटी एजुकेशन हमारी प्राथमिकता
बेहतर शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। सरकार छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन देने की कई अहम योजनाओं पर काम कर रही है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। सरकार का लक्ष्य दिल्ली के सरकारी स्कूलों को अभिभावकों की फर्स्ट चॉइस बनाना है। सरकार ने महज 100 दिनों के कार्यकाल में ही स्कूल प्रशासन, डिजिटल सेवाएं, बहुभाषी शिक्षा और स्मार्ट क्लासरूम पर कई नीतिगत फैसले लिये। दिल्ली में इस वर्ष विश्वस्तरीय 75 नए सीएमश्री स्कूल खोलने का लक्ष्य है। दिल्ली को वर्ल्ड क्लास एजुकेशन और इनोवेशन का हब बनाया जा रहा है। सरकार नरेला में एडुसिटी बनाने जा रही है। सरकार शिक्षकों को भी समय-समय पर नये इनोवेशन के साथ ट्रेनिंग दे रही है। स्मार्ट क्लास शुरू करने से पहले शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया गया है।
जनता को बेहतर चिकित्सा
आयुष्मान आरोग्य मंदिर और मोहल्ला क्लीनिक को एक समान ठहराया जाना सही नहीं होगा। इन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जनता को बेहतर चिकित्सा मिल रही है और सरकार को कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ रहा है। जबकि मोहल्ला क्लीनिक भ्रष्टाचार का अड्डा थे। मोहल्ला क्लीनिक में डॉक्टरों को मरीज देखने पर प्रति मरीज के हिसाब से भुगतान किया जा रहा था, जिसमें डॉक्टर भी फर्जी मरीजों को देखते थे। वहीं, आरोग्य मंदिर में बेहतर जांच सुविधा के साथ-साथ बेहतर इंन्फ्रास्ट्रक्चर भी मिला है। मरीज को इलाके में ही सरकारी संपत्तियों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि पहले अपने लोगों को निजी फायदा पहुंचाने के लिए घरों में तथाकथित मोहल्ला क्लीनिक खोले गये थे। यही सबसे बड़ा फर्क है। हमारी सरकार ने 11 महीने में 319 से ज्यादा आरोग्य मंदिर खोले हैं। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक विधानसभा में 15 और दिल्ली भर में कुल 1100 आरोग्य मंदिर खोलने का है। सरकार चरणबद्ध तरीके से आरोग्य मंदिरों की संख्या को बढ़ाएगी। आरोग्य मंदिर में ओपीडी कक्ष, लैब, दवा वितरण काउंटर, वैक्सीनेशन यूनिट भी बनाए गए हैं।
सामाजिक समानता और राष्ट्र निर्माण
हमारी सरकार, मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’, के मूल मंत्र पर चल रही है, जो समावेशी विकास, सामाजिक समानता और राष्ट्र निर्माण के लिए काम करता है। इसका उद्देश्य बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों तक बुनियादी सुविधाएं, आवास, बिजली, पानी, स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना है। इसी मूल मंत्र के तहत वर्षों से दंगों की पीड़ा झेल रहे सिख समुदाय के प्रभावित पीड़ितों को हमारी सरकार ने राहत देने का काम करते हुए उन्हें सरकारी नौकरी दी है। सरकार ने विशेष प्रावधान के तहत दंगा पीडितों के परिजनों के लिए भर्ती नियमों में छूट का प्रावधान किया है। इससे पूर्व की सरकारों ने सिर्फ और सिर्फ सिख दंगों के नाम पर राजनीति की थी। हमारी सरकार राजनीति नहीं, लोगों की सेवा करने के लिए आई है।
सीएमश्री स्कूलों की शुरुआत
हमारी सरकार, सरकारी स्कूलों का कायाकल्प की योजना पर काम कर रही है। सरकार ने केंद्र की तर्ज पर सीएमश्री स्कूलों की शुरुआत की है। सरकारी स्कूल के 18 लाख और निजी स्कूल के 13 लाख बच्चों की जिम्मेदारी हमारी है। हमारी सरकार सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्टक्चर, स्मार्ट क्लास और 10 हजार प्यूरीफायर लगाने सहित अनेक काम कर रही है। स्कूलों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रखेगी, चाहे वह शौचालय, प्रयोगशालाएं, खेल मैदान या अन्य सुविधाएं हों। सरकार की प्राथमिकता बड़ी इमारतों या फ्लाईओवर बनाने से नहीं, बल्कि बेहतर स्कूल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर है। सरकार ने सभी स्कूलों में देश निर्माण के दृष्टिकोण से तीन नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों-नींव नव उद्यम और उद्यमिता विकास योजना, जीवन का विज्ञान तथा राष्ट्रीय नीति का औपचारिक शुभारंभ किया।
सामान्य कार्यकर्ता प्रधानमंत्री बन सकता है
भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसमें परिवारवाद, जातिवाद और क्षेत्रवाद नहीं है। यहां एक सामान्य कार्यकर्ता प्रधानमंत्री बन सकता है। मैं स्वयं भी इसकी उदाहरण हूं। मैंने खुद नहीं सोचा था कि मुझे देश की राजधानी का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। हमारे लिए गर्व का विषय है कि हमें नितिन नबीन जी के रूप में राष्ट्रीय युवा नेतृत्व मिला है। इसलिए कहा जाता है कि भाजपा का कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री ही नहीं, प्रधानमंत्री भी बन सकता है। वहीं, अन्य दलों में जातिवाद और एक ही परिवार की पार्टी का राज रहा है। हालात अब भी नहीं बदले हैं। दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा ऐसे ही नहीं बन गई है। भाजपा में समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को तरजीह दी जाती है बाकी दल परिवार और जातिवाद पर चल रहे हैं।
खत्म होगी प्रदूषण की समस्या
प्रदूषण को आने वाले समय में हम पूरी तरह से खत्म कर देंगे। सरकार प्रदूषण नियंत्रण को लेकर पूरे साल, सातों दिन अभियान चला रही है। इसके सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकार, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, स्मार्ट पार्किंग, एनसीआर के लिए यूनिफॉर्म व्हीकल रजिस्ट्रेशन पॉलिसी, औद्योगिक प्रदूषण पर सख्त कार्रवाई, इसके साथ ही दिल्ली में 3,300 किलोमीटर से अधिक लंबाई में सड़कों के पुनर्विकास, पहाड़ का रूप ले चुके लैंडफिल साइट को खत्म करना, डस्ट कंट्रोल, ट्रैफिक मैनेजमेंट तथा सड़क रखरखाव अनुबंधों में 72 घंटे के भीतर गड्ढों की मरम्मत जैसे कदम उठा रही है। प्रदूषण सिर्फ दिल्ली के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि यह दिल्ली एनसीआर सहित देश के सभी राज्यों की समस्या है।