यूएस से संघर्ष के चलते ईरान के हालात कुछ खास अच्छे नहीं हैं, तो पाकिस्तान में कानून व्यवस्था की खराब स्थिति काफी खराब है। यही वजह है कि इन दोनों देशों में कभी जिंदगी तलाशते पहुंचे अफगान नागरिक अब अपने वतन का रुख कर रहे हैं। रविवार को अफगानिस्तान की सरकार के नुमांइदे ने बताया कि पड़ोसी देश ईरान और पाकिस्तान से लगभग 104 परिवार (जिनमें कुल 448 लोग शामिल थे) देश लौट आए हैं।
एक्स अकाउंट पर कमीशन की रिपोर्ट शेयर की
इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान (आईईए) के डिप्टी प्रवक्ता मुल्ला हमदुल्लाह फितरत ने अपने एक्स अकाउंट पर कमीशन की रिपोर्ट शेयर की। इसके साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि देश कैसे लोगों को मैनेज कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 28 परिवार (जिनमें 138 लोग शामिल थे) तोरखम क्रॉसिंग से लौटे और उनका रजिस्ट्रेशन किया गया।
अफगानी नकदी सहायता दी गई
कमिशन ने बताया कि 25 परिवारों (जिनमें 112 लोग शामिल थे) को तोरखम से अलग-अलग प्रांतों में भेजा गया और उनके ट्रांसपोर्ट के खर्च के लिए 86,970 अफगानी (मुद्रा) दिया गया। इसमें आगे बताया गया कि तोरखम में 29 परिवारों को कुल 232,000 अफगानी नकदी सहायता दी गई। स्वास्थ्य और टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
99,200 अफगानी दिए गए
वहीं, कंधार प्रांत में स्पिन बोल्डक क्रॉसिंग से 11 परिवार (जिनमें 51 लोग शामिल थे) लौटे। इनमें से 10 परिवारों (जिनमें 45 लोग शामिल थे) को अलग-अलग प्रांतों में भेजा गया और उनके ट्रांसपोर्ट के खर्च के लिए 99,200 अफगानी दिए गए।
कुल मिलाकर, 448 लोगों के 104 परिवार अफगानिस्तान लौटे, जिनमें से 187 लोगों के 43 परिवारों को अलग-अलग प्रांतों में भेजा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 51 परिवारों को मदद दी गई और टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क मदद के तहत 43 सिम कार्ड बांटे गए।
अफगान नागरिक वापस लौटे हैं
हाल ही में इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन ने एक रिपोर्ट छापी थी। 8 अक्टूबर को प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले तीन सालों में ईरान और पाकिस्तान से 65 लाख से ज्यादा अफगान नागरिक वापस लौटे हैं। इसके साथ ही, संस्था ने फिक्र जताई कि अफगानिस्तान में इन लोगों को फिर से बसाने या संभालने की क्षमता नहीं है।
बुनियादी सुविधाओं तक सीमित पहुंच
अफगानिस्तान लौटने वालों की स्थिति और उनके दोबारा बसने की प्रक्रिया पर रिपोर्ट का तीसरा हिस्सा संस्था ने जारी किया। इस रिपोर्ट में उचित दस्तावेज विहीन प्रवासियों का अध्ययन किया गया, जो लौटने के बाद अफगानिस्तान में कम से कम आठ महीने तक रहे थे। वापस लौटने वालों के सामने दोबारा बसने की कोशिश में गरीबी, बेरोजगारी, रहने की जगह की कमी और बुनियादी सुविधाओं तक सीमित पहुंच जैसी मुख्य चुनौतियां सामने आईं।