UP News: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी के बीच प्रदेश सरकार अब अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं पांच साल और लेने की तैयारी में है। इसके लिए डॉक्टरों की री-अपॉइंटमेंट की अधिकतम उम्र 65 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में महानिदेशालय से प्रस्ताव मांगा है। प्रस्ताव लागू होने पर 65 वर्ष की उम्र के बाद डॉक्टरों को क्लिनिकल सेवाओं के लिए पांच वर्ष तक फिर मौका मिल सकेगा।
अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अक्टूबर 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकार ने पीएमएस संवर्ग में 19,659 स्वीकृत पद बताए थे। इनमें सिर्फ 11,018 डॉक्टर नियमित रूप से तैनात थे। 283 डॉक्टर पुनर्नियोजन और 404 वॉक-इन व्यवस्था से काम कर रहे थे। एनएचएम के 2,508 डॉक्टर जोड़ने पर भी कुल संख्या 14,213 थी। यानी स्वीकृत पदों के मुकाबले बड़ा अंतर बना हुआ है।
विशेषज्ञों की कमी सबसे गंभीर
सबसे ज्यादा संकट विशेषज्ञ डॉक्टरों का है। जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी करीब 70 फीसदी तक है। एनएचएम को संविदा भर्ती का सहारा लेना पड़ रहा है। जनवरी में 710 डॉक्टरों के लिए साक्षात्कार भी कराए गए थे। विशेषज्ञों की भर्ती में समस्या का अंदाजा पीएमएस एसोसिएशन के जुलाई 2026 के आंकड़ों से भी लगता है। लेवल-2 के विशेषज्ञ डॉक्टरों के 3,602 पद सीधे भर्ती के लिए बनाए गए, लेकिन छह साल में केवल 486 विशेषज्ञ ही सेवा में आए।
भर्ती बोर्ड भी छह महीने से इंतजार में
विशेषज्ञ चिकित्सकों और नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षकों की भर्ती तेज करने के लिए जनवरी 2026 में अलग भर्ती बोर्ड बनाया गया था। इसके बावजूद करीब छह महीने तक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक मानक पूरे होने के बाद इसी महीने भर्ती शुरू होने की संभावना है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के महामंत्री डॉ. शरद वैश्य का कहना है कि खाली पदों को भरने में लगातार दिक्कत आ रही है और सबसे ज्यादा परेशानी विशेषज्ञ चिकित्सकों की है। ग्रामीण सीएचसी और पीएचसी में स्थिति और खराब है। उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक भी मार्च 2026 में डॉक्टरों की कमी जल्द दूर करने की बात कह चुके हैं। सरकार विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए संविदा व्यवस्था में पांच लाख रुपये प्रतिमाह तक का मानदेय भी दे रही है, फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है।
रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का सफर
2016 में पीएमएस डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की गई। 2019 में 62 के बाद तीन वर्ष री-अपॉइंटमेंट का प्रावधान हुआ। 2023 में सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई। अब री-अपॉइंटमेंट की सीमा 70 वर्ष करने की तैयारी है। यानी नए डॉक्टरों की भर्ती में लगातार आ रही अड़चन के बीच सरकार के सामने तत्काल इलाज की व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुराने अनुभवी चिकित्सकों पर निर्भरता बढ़ रही है।