हरियाणा के फरीदाबाद में मिले विस्फोटक और दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ा सुराग हाथ लगा है। जिन संदिग्ध आतंकियों को दिल्ली ब्लास्ट से पहले और बाद में गिरफ्तार किया गया था, उनके मोबाइल फोन से डिलीट किया गया डेटा रिकवर कर लिया गया है। इस महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत ने जांच को नई दिशा दे दी है। अधिकारियों के अनुसार फोन में मिले डेटा से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जो आतंकी नेटवर्क और उनकी गतिविधियों को समझने में बड़ा रोल निभा सकती हैं।
4 संदिग्धों के फोन से बरामद खतरनाक कंटेंट
जिन संदिग्ध आतंकियों के फोन से डेटा निकाला गया है, उनके नाम डॉक्टर मुजम्मिल, आदिल, शाहीन और इरफान बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इन चारों के फोन से ऐसे ऑडियो और वीडियो मिले हैं जो सीधे-सीधे कट्टरपंथ और आतंकी गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं। खास तौर पर डॉक्टर मुजम्मिल के मोबाइल ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है, क्योंकि अकेले उसके फोन में करीब 200 वीडियो मौजूद थे। यह वीडियो न सिर्फ उकसाने वाले भाषणों से भरे थे, बल्कि इनमें कई देशों के कुख्यात आतंकी नेताओं की सामग्री भी शामिल थी।
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मसूद और ISIS से जुड़े आतंकियों के वीडियो मिले
बरामद वीडियो में मसूद अजहर, असगर और जैश-ए-मोहम्मद के कई कमांडरों के भाषण शामिल हैं। इसके अलावा ISIS से जुड़े आतंकियों की तकरीरें और वीडियो सामग्री भी फोन में पाई गई है। इनमें से लगभग 80 वीडियो सीधे तौर पर आतंकी ट्रेनिंग, बम बनाने के तरीकों, केमिकल रिएक्शन्स और विस्फोटक तैयार करने से जुड़े रिसर्च पर आधारित हैं। इससे यह साफ होता है कि संदिग्ध आतंकी केवल प्रचार सामग्री ही नहीं देख रहे थे, बल्कि सक्रिय रूप से बम मेकिंग जैसी खतरनाक जानकारी भी हासिल कर रहे थे। यह डेटा सुरक्षा एजेंसियों को यह समझने में मदद देगा कि ये लोग किसी बड़े हमले की तैयारी में थे या इनकी भूमिका किसी नेटवर्क तक सीमित थी।
धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले बाजारों के वीडियो
मुजम्मिल के फोन में दिल्ली, यूपी, मुंबई सहित कई राज्यों के धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले बाजारों के वीडियो मिले हैं। ये वीडियो सामान्य रिकॉर्डिंग नहीं लगते बल्कि रेकी यानी संभावित हमले की तैयारी का हिस्सा माने जा रहे हैं। एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि इन वीडियो को कहां और कब रिकॉर्ड किया गया। अगर यह साबित होता है कि इन स्थानों की रेकी की गई थी, तो इससे कई राज्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर नया सवाल खड़ा हो सकता है। फिलहाल सभी बरामद डेटा को फॉरेंसिक टीम आंका रही है और इससे जुड़े नेटवर्क की तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।