मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल ने कानपुर सहित यूपी के निर्यातकों को परेशानी में डाल दिया है। पहले वेनेजुएला फिर ईरान और अब ग्रीनलैंड, क्यूबा के साथ भी कारोबारी संकट खड़ा हो गया है। साल 2025 की तरह 2026 में भी अमेरिकी टैरिफ ने निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। फियो के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ दिनों पहले अमेरिकी की ओर से वेनेजुएला में जिस तरह की गतिविधियां की गई और अब ईरान के साथ युद्ध जैसे हालात बन गए हैं, इससे निर्यातकों ने करोड़ों रुपए के ऑर्डर्स रोक दिए हैं।
चार देशों के साथ कारोबार ठप
अमेरिका की ओर से की जा रही कार्रवाई का असर छोटे देशों ग्रीनलैंड और क्यूबा तक दिखने लगा है। वहां भी कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसका असर यूपी के निर्यातकों पर भी पड़ रहा है। निर्यातकों का कहना है कि चार देशों के साथ कारोबार ठप हो चुका है। न आर्डर मिल रहे, न कारोबारी बात कर रहे हैं।
बासमती चावल का बड़ा निर्यातक बाजार
फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि ईरान को अगर हम यूपी के कारोबारी नजरिए से देखें तो यह बासमती चावल का बड़ा निर्यातक बाजार है। इसके अलावा सुगंध वाले उत्पाद, दवाइयां, रेडीमेड गारमेंट्स, लेदर उत्पाद, फल और सब्जियां भी ईरान को यूपी से निर्यात की जाती हैं।
1000 करोड़ का निर्यात ईरान को किया जाता है
यूपी से सालाना करीब 1000 करोड़ का निर्यात ईरान को किया जाता है। अकेले कानपुर से ही 15 से 20 करोड़ रुपए का निर्यात होता है। पिछले कुछ समय से अमेरिका ने जो स्थितियां पैदा कर दी हैं, उससे कारोबार गिरता जा रहा है। इसी तरह ग्रीनलैंड और क्यूबा के साथ भी कारोबार न के बराबर हो गया है।
फूंक-फूंककर कदम रखना पड़ रहा है
आईआईए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने बताया कि अमेरिका ने यूपी के निर्यात कारोबार को पूरी तरह से ठप कर दिया है। पिछले साल तक यूपी के निर्यातकों को अमेरिका से अच्छा कारोबार मिलता था, लेकिन हालात दिनों दिन खराब होते जा रहे हैं। निर्यातकों को अब फूंक-फूंककर कदम रखना पड़ रहा है।
दिक्कतों का सामना करना ही होगा
काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी ने बताया कि जब तक अमेरिका के साथ हालात बेहतर नहीं होंगे, तब तक निर्यातकों को अभी दिक्कतों का सामना करना ही होगा। निर्यातकों के लिए पिछले एक साल से लगातार चुनौतियां ही चुनौतियां बरकरार हैं। हम सरकार से मांग करते हैं कि सरकार हमारी मदद करे।