पाकिस्तान की मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने शुक्रवार को पत्रकार सोहराब बरकत की जारी हिरासत, जबरन गायब किए जाने और न्यायिक उत्पीड़न पर गहरी चिंता व्यक्त की है। परिषद ने कहा कि यह मामला देश में प्रेस की स्वतंत्रता, विधि प्रक्रिया और संवैधानिक सुरक्षा के सम्मान पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तानी मीडिया ‘सियासत’ के संवाददाता सोहराब बरकत को कथित तौर पर 26 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना होने के दौरान इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से हिरासत में लिया गया था।
कई मामलों में फंसाया गया
एचआरसी पाकिस्तान के अनुसार, हिरासत के बाद बरकत को अवैध रूप से लाहौर स्थानांतरित किया गया और उनके खिलाफ कई मामलों में फंसाया गया, जबकि इस्लामाबाद हाईकोर्ट में आधिकारिक तौर पर यह बताया गया था कि उनके खिलाफ कोई जांच या मामला लंबित नहीं है और वे यात्रा करने के लिए स्वतंत्र हैं। परिषद का कहना है कि अदालत में दिए गए बयानों और बाद की कार्रवाइयों के बीच का विरोधाभास कानून के शासन के प्रति चिंताजनक उपेक्षा को दर्शाता है।
गतिविधियां पत्रकारिता के दायरे में आती हैं
मानवाधिकार परिषद ने कहा कि बरकत पर लगाए गए आरोप पूरी तरह उनके पेशेवर पत्रकारिता कार्य से जुड़े हैं, जिसमें साक्षात्कार करना, समाचार सामग्री का संपादन और प्रकाशन, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग, तथा राजनीतिक असहमति और मानवाधिकार मुद्दों की कवरेज शामिल है। परिषद ने कहा कि ये सभी गतिविधियां पत्रकारिता के दायरे में आती हैं।
आरोपों के बिना बार-बार रिमांड पर भेजा गया
एचआरसी ने इस बात पर भी चिंता जताई कि बरकत को बिना विधिक प्रक्रिया के हिरासत में लिया गया, अदालत में देरी से पेश किया गया। आरोपों के बिना बार-बार रिमांड पर भेजा गया और उन्हें परिवार व कानूनी सलाहकार से पर्याप्त संपर्क से वंचित रखा गया। परिषद के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया के अहम चरणों पर नए-नए मामलों का सामने आना जमानत में बाधा डालने और हिरासत को लंबा करने का प्रयास है। इससे कानून के दुरुपयोग की आशंका और गहरी होती है।