मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी 413 नगर निकायों में कर्मचारियों की उपस्थिति चेहरे की पहचान से दर्ज की जाएगी। 1 नवंबर से लागू होने जा रहे फेस-बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम के तहत कर्मचारियों की हाजिरी और वेतन, दोनों इसी तकनीक पर आधारित होंगे। इस नई व्यवस्था से हाजिरी में फर्जीवाड़े और देरी जैसी पुरानी प्रथाओं पर रोक लगेगी और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा।
फेस स्कैन से दर्ज होगी उपस्थिति
नई व्यवस्था के तहत अब हर कर्मचारी की उपस्थिति मोबाइल ऐप या बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से फेस स्कैन करके दर्ज होगी। भोपाल समेत कुछ बड़े नगर निगमों में यह व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कर्मचारी समय पर दफ्तर पहुंचे और पूरा कार्यकाल पूरा करें।
1.35 लाख कर्मचारी जुड़ चुके हैं सिस्टम से
राज्य सरकार के अनुसार, अब तक 1 लाख 35 हजार से अधिक नगरीय निकाय कर्मचारी फेस-बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम में पंजीकृत हो चुके हैं। इनकी उपस्थिति सीधे डिजिटल सर्वर पर दर्ज होगी और वेतन भुगतान भी इसी डेटा के आधार पर किया जाएगा। इससे “दूसरे की जगह साइन करने” जैसी गड़बड़ियों की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की पहल
इस डिजिटल सिस्टम का उद्देश्य कार्यस्थलों पर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना है। अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि कर्मचारियों की उत्पादकता में भी वृद्धि होगी। फेस रिकग्निशन तकनीक हर कर्मचारी की पहचान को सुरक्षित तरीके से दर्ज करती है, जिससे उपस्थिति प्रक्रिया विश्वसनीय बन जाती है।
1 नवंबर से सभी निकायों में अनिवार्य
नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को निर्देश दिया है कि यह सिस्टम 1 नवंबर से पूर्ण रूप से चालू कर दिया जाए। विभाग ने सर्वर सपोर्ट और तकनीकी सहायता की व्यवस्था भी की है ताकि किसी निकाय को तकनीकी दिक्कत न हो। यह पहल डिजिटल प्रशासन और स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा में मध्यप्रदेश का एक और कदम साबित होगी।