Political Questions from Congress: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। दावोस में निवेशकों से मुलाकात के बाद फडणवीस ने करीब 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों का दावा किया। इसी को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है और पुराने एमओयू के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस का तंज और आरोप
कांग्रेस नेता अतुल लोंढे ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि फडणवीस “बैंड-बाजे के साथ” दावोस गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर वाकई इतना बड़ा निवेश आ रहा है तो क्या मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि निवेश के बड़े दावों से पहले सरकार को पुराने समझौतों का हिसाब देना चाहिए।
एमओयू पर अमल को लेकर सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार ने जिन कंपनियों के साथ अब तक एमओयू साइन किए हैं, उनमें से कई कंपनियां अनलिस्टेड या रजिस्टर्ड ही नहीं हैं। पार्टी का कहना है कि पहले किए गए समझौतों में से कितने जमीन पर उतरे, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए। विपक्ष ने दावा किया कि निवेश के आंकड़े कागजों तक ही सीमित हैं।
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सीएम फडणवीस का जवाब
इन आरोपों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि दावोस में हुए निवेश समझौते औद्योगिक, सेवा, कृषि और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों से जुड़े हैं। उनके मुताबिक, एमओयू के क्रियान्वयन की दर करीब 75 प्रतिशत है और पिछले साल किए गए समझौते भी काफी हद तक लागू हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि निवेश को जमीन पर उतरने में 3 से 7 साल का समय लगता है।
आगे की राजनीति पर नजर
फडणवीस ने यह भी बताया कि 30 लाख करोड़ रुपये के समझौतों के अलावा 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश पर शुरुआती बातचीत पूरी हो चुकी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले वर्षों में ये निवेश दावे कितने हकीकत में बदलते हैं और इसका महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।