लखनऊ, प्रयागराज माघ मेला-2026 की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने पहले 15 दिसंबर और फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 31 दिसंबर तक सभी कार्य पूरे करने की डेडलाइन तय की गई है। माघ मेले का 3 जनवरी 2026 को पहला स्नान पर्व है। स्थिति यह है कि मेला क्षेत्र में अब भी करीब 35 से 40 प्रतिशत काम अधूरे हैं। संगम की रेती पर मेला आकार तो ले रहा है, लेकिन रफ्तार और दावों के बीच बड़ा फासला साफ दिख रहा है। कहीं पानी निकासी का पाइप नहीं बिछी है तो कहीं सीवरलाइन नहीं पड़ी है। संस्थाओं के टेंट अभी अधूरे हैं। किसी संस्था का गेट बनकर खड़ा है तो किसी के टेंट नहीं लगे हैं। कहीं सामान गिरा है तो वर्कर नहीं तो कहीं सुविधा पर्ची के अनुरूप सामान ही नहीं मिला है.
जमीन आवंटन को लेकर अब भी हंगामा
साधु-संन्यासियों का कहना है कि वे मेलाधिकारी से मिलकर अपनी बात कहना चाहते हैं पर मिल नहीं रहे हैं। मेला कार्यालय के बाहर धरना-पर्दशन चल रहा है और एआईट्रिपलसी में प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल, मेलाधिकारी ऋषि राज, जिलाधिकारी मनीष वर्मा, एसपी माघ मेला नीरज पांडेय अधीनस्थ अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे हैं। इससे पहले कि साधु-संन्यासी मिलकर अपनी बात कह सकते, अधिकारी मीटिंग खत्मकर निकल गए। इस बात की जानकारी होने पर बड़ी संख्या में साधु-संन्यासी मेला कार्यालय में घुस गए। अधिकारियों को न पाकर नारेबाजी करने लगे.
सरकार को बदनाम करना चाहते हैं अधिकारी
जूना अखाड़े के अष्टकौशल योगानंद गिरि का कहना है कि योगी आदित्यनाथ सरकार को ये अधिकारी बदनाम करना चाहते हैं। माघ मेला साधु-संन्यासियों से होता है। अगर वे माघ मेले में नहीं आएंगे और उनको जमीनें तथा सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो किसे मिलेंगी. अधिकारी मेला को कॉमर्शियल बनाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं न कि आध्यात्मिक। 9 दिसंबर को आवेदन किया, इसके बाद 24 को आवेदन दिया गया बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर यही हाल रहा तो मेला पूरी तरह से कॉमर्शियल हो जाएगा। आम आदमी और श्रद्धालुओं के लिए यह मेला नहीं रह जाएगा.
पानी निकासी की व्यवस्था ही नहीं
खाक व्यवस्था समिति के कोतवाल संत भैरवदास अधिकारियों के रवैये से काफी नाराज नजर आए। कहा कि इस साल महामाघ बहुत दिव्य तरीके से मनाने की प्लानिंग है। शासन–प्रशासन ने बहुत अच्छी व्यवस्था कर रखी है। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम हैं। पानी की काफी अच्छी व्यवस्था है पर पानी निकासी की अभी तक व्यवस्था नहीं बन पाई है। टेंट के बाहर इशारा करते हुए भैरव दास ने कहा कि दोनों तरफ गली में ऐसे ही पानी जमा है। अभी तक निकासी का कनेक्शन नहीं हो पाया है.