मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जहां पांच लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए अनुकंपा नियुक्ति हासिल कर ली। इन लोगों ने अपने माता-पिता की झूठी मृत्यु का प्रमाण पत्र बनवाया और सरकारी स्कूलों में सेवा करते हुए मृत दर्शा दिया, जबकि हकीकत में न तो वे शिक्षक थे और न ही उनका निधन हुआ था। एक साल में इतने बड़े स्तर पर की गई फर्जी नियुक्तियों से सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
फर्जी दस्तावेजों से पाई सरकारी नौकरी
जांच में सामने आया है कि इन पांचों ने झूठे दस्तावेज तैयार करवाकर शिक्षा विभाग में अनुकंपा के तहत नौकरी पा ली। इस फर्जीवाड़े में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का एक क्लर्क भी शामिल पाया गया है, जिसने दस्तावेजों की वैधता जांचे बिना ही उन्हें आगे बढ़ा दिया।
संभागीय आयुक्त ने दिए जांच के आदेश
घोटाला उजागर होने के बाद संभागीय आयुक्त ने रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली जिलों में पिछले तीन वर्षों में हुई सभी अनुकंपा नियुक्तियों की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं और भी तो इस तरह की फर्जी नियुक्तियां नहीं हुई हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
इससे पहले भी अनुकंपा नियुक्तियों में अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं। जांच और सत्यापन के बावजूद नई नियुक्तियों में पारदर्शिता की भारी कमी नजर आई है। अधिकारियों का कहना है कि सभी नियुक्तियों का दोबारा सत्यापन कराया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्या होती है अनुकंपा नियुक्ति?
अनुकंपा नियुक्ति एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत किसी सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु या स्थायी विकलांगता होने पर उसके परिवार के किसी एक सदस्य को आर्थिक सहायता स्वरूप नौकरी दी जाती है। इसका उद्देश्य प्रभावित परिवार को तुरंत राहत देना होता है, लेकिन अब इसे भी घोटालेबाजों ने अपनी धोखाधड़ी का जरिया बना लिया है।