उत्तर प्रदेश के बिजनौर में खुद को देश की खुफिया एजेंसी का बड़ा अधिकारी बताकर घूम रहा एक शख्स आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया। मेरठ एसटीएफ ने धामपुर इलाके से एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो का डिप्टी डायरेक्टर बताकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर रौब जमाता था। आरोपी लंबे समय से इसी फर्जी पहचान के सहारे डराने-धमकाने और दबाव बनाने का खेल खेल रहा था।
खास इनपुट के बाद एसटीएफ ने की कार्रवाई
एसटीएफ को आरोपी के बारे में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। बताया जा रहा था कि वह अलग-अलग जगहों पर खुद को दिल्ली से जुड़ा बड़ा अफसर बताकर अधिकारियों को निर्देश देता और काम में दखल देता था। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ ने आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। पुख्ता सूचना मिलने के बाद टीम ने शुक्रवार को धामपुर क्षेत्र में दबिश देने की योजना बनाई।
रेस्टोरेंट के पास से ऐसे पकड़ा गया आरोपी
एसटीएफ की टीम नगीना रोड स्थित गुलमोहर रेस्टोरेंट के पास पहुंची और मौके से मनोज चौहान नाम के युवक को हिरासत में ले लिया। आरोपी खुद को “आईबी का डिप्टी डायरेक्टर” बताकर घूम रहा था। पूछताछ में उसने कई बार खुद को दिल्ली में तैनात वरिष्ठ अधिकारी बताया और पुलिसकर्मियों पर भी रौब दिखाने की कोशिश की, लेकिन एसटीएफ के सवालों के सामने उसकी पोल खुलती चली गई।
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पूछताछ में सामने आ रहे चौंकाने वाले खुलासे
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को धामपुर कोतवाली ले जाया गया, जहां उससे देर रात तक पूछताछ की गई। एसटीएफ आरोपी के पास मौजूद पहचान पत्रों, मोबाइल फोन और संपर्कों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने अब तक कितने लोगों और अधिकारियों को अपने झांसे में लिया और कहीं उसने इस फर्जी पहचान के जरिए किसी तरह का आर्थिक फायदा तो नहीं उठाया।
अकेला खिलाड़ी या किसी गिरोह का हिस्सा?
जांच एजेंसियों को शक है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। एसटीएफ इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपी किसी संगठित गिरोह का हिस्सा तो नहीं है, जो इस तरह फर्जी अफसर बनकर लोगों को डराने और फायदा उठाने का काम करता हो। अगर ऐसे किसी नेटवर्क का खुलासा होता है, तो आगे और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।
पुलिस की आम लोगों से अपील
इस पूरे मामले के बाद पुलिस ने आम जनता और सरकारी कर्मचारियों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति खुद को किसी खुफिया या बड़े सरकारी पद पर बताकर दबाव बनाए, तो उसकी पहचान जरूर जांचें। किसी भी तरह के शक की स्थिति में तुरंत पुलिस या एसटीएफ को सूचना दें। यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि फर्जी अफसर बनकर रौब जमाने वालों के लिए कानून में कोई जगह नहीं है।