आज के समय में मोबाइल फोन हमारी ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग, भुगतान, ओटीपी, जरूरी मैसेज, हर काम मोबाइल से ही होता है। लेकिन अब यही मोबाइल स्कैमर्स का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। हाल ही में सामने आए एक नए तरह के स्कैम ने साइबर एक्सपर्ट्स की भी चिंता बढ़ा दी है। यह स्कैम आम मैसेज फ्रॉड जैसा नहीं, बल्कि नेटवर्क स्तर पर हमला है, जिसमें यूज़र को पता भी नहीं चलता।
नकली मोबाइल टावर से शुरू होता है खेल
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक अब ठग नकली मोबाइल टावर का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये छोटे पोर्टेबल डिवाइस होते हैं, जो असली मोबाइल टावर जैसे सिग्नल देते हैं। जब आपका फोन नेटवर्क खोजता है, तो वह सबसे मजबूत सिग्नल पकड़ता है। कई बार यह सिग्नल असली नहीं, बल्कि नकली टावर का होता है। इसी को Fake BTS यानी नकली बेस स्टेशन कहा जाता है।
फोन चला जाता है कमजोर नेटवर्क पर
जब फोन नकली टावर से जुड़ता है, तो उसे जानबूझकर 4G या 5G से हटाकर 2G जैसे कमजोर नेटवर्क पर डाल दिया जाता है। कमजोर नेटवर्क पर सुरक्षा बहुत कम होती है। इसी कमी का फायदा स्कैमर्स उठाते हैं। इस दौरान आपका फोन असली नेटवर्क से कट जाता है और आप एक खतरनाक जाल में फंस जाते हैं, बिना किसी चेतावनी के।
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SMS Blaster स्कैम क्या है
नकली टावर से जुड़ने के बाद शुरू होता है SMS Blaster स्कैम। इसमें आपके फोन नंबर से बड़े पैमाने पर फर्जी मैसेज भेजे जाते हैं। ये मैसेज बैंक खाता बंद होने, केवाईसी अपडेट या ओटीपी से जुड़े होते हैं। मैसेज ऐसा होता है कि डर और जल्दबाज़ी पैदा हो जाए। जैसे ही कोई लिंक पर क्लिक करता है या जानकारी देता है, पैसा साफ हो जाता है।
यूज़र को क्यों नहीं चलता पता
इस स्कैम की सबसे खतरनाक बात यही है कि यह नेटवर्क लेवल पर होता है। यूज़र को न कोई ऐप डाउनलोड करना पड़ता है, न कोई लिंक क्लिक करना जरूरी होता है। ओटीपी, मैसेज और निजी जानकारी चुपचाप स्कैमर्स तक पहुंच सकती है। कई मामलों में तो यूज़र को बाद में पता चलता है कि खाते से पैसे निकल चुके हैं।
अब खतरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं
यह स्कैम सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि दूसरे देशों में भी सामने आ चुका है। यूरोप में भी ऐसे मामलों में गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जहां कार के अंदर नकली टावर छिपाकर लोगों को फंसाया गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह साइबर अपराध का नया और बेहद खतरनाक तरीका है। आम लोगों के लिए जरूरी है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध मैसेज या अचानक नेटवर्क बदलाव को हल्के में न लें।