ग्रेटर नोएडा से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो लंबे समय से खुद को “मेजर अमित” और “रॉ का वरिष्ठ अधिकारी” बताकर रह रहा था। आरोपी की असल पहचान सुमित कुमार के रूप में हुई है। वह शहर की एक हाई-राइज सोसाइटी में पूरी फर्जी पहचान के साथ रह रहा था और लोगों को विश्वास दिलाता था कि वह खुफिया एजेंसी में उच्च पद पर तैनात है। पुलिस जब उसके कमरे पर पहुँची, तो उसे नंगे पैर ही पकड़कर बाहर ले जाया गया, क्योंकि आरोपी गिरफ्तारी के दौरान कोई प्रतिरोध नहीं कर पाया।
पूरी जांच के दौरान एसटीएफ को उसके कमरे से कई चौंकाने वाले सबूत मिले। उसके पास से एक लैपटॉप और टैबलेट जब्त किए गए, जिनमें से लैपटॉप की जांच में दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ा एक वीडियो मिला। यह वीडियो बेहद संवेदनशील माना जा रहा है और इसे तुरंत उच्च स्तर की खुफिया एजेंसियों को भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह वीडियो उसके पास कैसे आया और क्या उसकी किसी आतंकी मॉड्यूल से सीधी या अप्रत्यक्ष कड़ी है। इस तथ्य ने जांच agencies को गंभीर रूप से चौकन्ना कर दिया है।
आरोपी के कमरे से बरामद दस्तावेजों में एक फर्जी रॉ आईडी कार्ड, सरकारी डिपार्टमेंट्स के कई नकली लेटरहेड, चेक बुक और कुछ ऐसे कागजात मिले हैं जो किसी आम व्यक्ति के पास नहीं हो सकते। यही नहीं, जिस फ्लैट में वह किराये पर रह रहा था, वहाँ किरायेदारी के दौरान उसने अपनी पहचान “मेजर अमित कुमार” के रूप में दी थी और वेरिफिकेशन के लिए दिल्ली पुलिस के अधिकारी के नाम पर एक फर्जी प्रमाण पत्र भी दिखाया था। घर मालिक को उसने बताया था कि वह गोपनीय सरकारी ड्यूटी पर रहता है, इसलिए उसके आने-जाने का सिलसिला अनियमित होता है।
एसटीएफ अब यह भी जांच कर रही है कि वह इस सोसाइटी में कब से रह रहा था, किससे मिलता था और क्या उसने अपनी फर्जी पहचान का उपयोग किसी आर्थिक लाभ, ब्लैकमेल या अन्य अवैध कार्यों में किया। स्थानीय निवासियों से पूछताछ में यह सामने आया कि वह बेहद आत्मविश्वास से भरा रहता था और अक्सर सरकारी एजेंसियों के नाम लेकर धौंस जमाया करता था। कई लोगों ने बताया कि वह बेहद रहस्यमय तरीके से व्यवहार करता था और अपनी ‘गोपनीय पोस्टिंग’ का हवाला देकर निजी सवालों से बचता था।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी पर आईपीसी की गंभीर धाराएँ और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। खुफिया एजेंसियाँ अब उसके डिजिटल डिवाइसेज़ की गहन जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसका किसी आतंकी संगठन से कोई वास्ता है या वह केवल लोगों को प्रभावित करने के लिए संवेदनशील वीडियो इकट्ठा करता था।