fraud: पूर्वी जिला पुलिस की एएटीएस (एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड) ने गुरु अंगद नगर इलाके में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जो अमेरिकी नागरिकों को झूठे तकनीकी सपोर्ट के नाम पर ठग रहा था। पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से छह लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
इन आरोपियों की हुई पहचान
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सूरज कुमार (नालंदा, बिहार), अभिषेक शर्मा (इंदिरापुरम, गाजियाबाद), शिव गुप्ता (बबराला, संभल), राहुल अग्रवाल (करोल बाग) और राहुल चौहान (कुतुब विहार फेज-1) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, ये सभी मिलकर अमेरिकी नागरिकों को यह कहकर झांसा देते थे कि उनके कंप्यूटर में वायरस आ गया है। फिर “माइक्रोसॉफ्ट” या “अमेजन सपोर्ट” टीम के कर्मचारी बनकर कॉल करते और ‘डेविड’ नाम से खुद को पेश करते थे।
फर्जी कॉल सेंटर की सूचना
जानकारी के अनुसार पूर्वी जिला एएटीएस को शुक्रवार शाम सूचना मिली थी कि गुरु अंगद नगर के डी-ब्लॉक में एक बिल्डिंग के अंदर फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है। देर रात पुलिस टीम ने वहां छापा मारा, लेकिन दरवाजा बंद मिला। शनिवार तड़के जब दरवाजा खुला तो दूसरे माले पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ। मौके से पुलिस ने छह लैपटॉप, प्रिंटर और कई मोबाइल फोन बरामद किए।
कंप्यूटर को रिमोट एक्सेस
जांच में सामने आया कि आरोपी ‘वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP)’ के जरिए विदेशों से कॉल करते थे और ‘अल्ट्रा व्यूअर’ जैसी ऐप इंस्टॉल कराकर अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर को रिमोट एक्सेस पर ले लेते थे। इसके बाद स्क्रीन पर खुद से वायरस या सिस्टम एरर का फर्जी मैसेज दिखाते और उसे ठीक करने के नाम पर ठगी करते।
कैश में बदल देता था अमेरिकी सहयोगी
आरोपियों के अमेरिकी साथी द्वारा उपलब्ध कराए गए कुछ नंबरों को इंटरनेट पर माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन सपोर्ट के आधिकारिक नंबर बताकर डाल रखा गया था। जब अमेरिकी नागरिक उन नंबरों पर कॉल करते, तो कॉल सीधे इस दिल्ली स्थित फर्जी सेंटर में आ जाती थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी हर पीड़ित से 4,500 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की ठगी करते थे। भुगतान गिफ्ट कार्ड्स के रूप में लिया जाता था, जिन्हें उनका अमेरिकी सहयोगी कैश में बदल देता था। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के पीछे और कौन लोग शामिल हैं तथा अमेरिका में बैठे सहयोगी तक कैसे पहुंच बनाई जा सकती है।