डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार गिरती कीमत ने आर्थिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। कमजोर होता रुपया सरकार और वित्तीय संस्थानों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। इसी बीच अब भारतीय रिजर्व बैंक की अगली रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
RBI ने दिए बड़े संकेत
रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक अब पुराने फॉर्मूले को दोबारा अपनाने पर विचार कर सकता है। बताया जा रहा है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिए हैं कि मुद्रा को स्थिर करने के लिए कई विकल्पों पर चर्चा हो रही है। इनमें ब्याज दरों में बदलाव और विदेशी मुद्रा प्रबंधन जैसे कदम शामिल बताए जा रहे हैं।
फिर चर्चा में पुरानी रणनीति
आर्थिक जगत में एक बार फिर टैपर टैंट्रम प्लेबुक की चर्चा शुरू हो गई है। यह वही रणनीति है जिसका इस्तेमाल पहले भी आर्थिक दबाव के समय किया गया था। इस मॉडल के तहत बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने और रुपये को सहारा देने की कोशिश की जाती है। इसका उद्देश्य मुद्रा बाजार में संतुलन बनाए रखना होता है।
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2013 में भी किया गया था इस्तेमाल
इससे पहले 2013 में भी ऐसी स्थिति देखने को मिली थी। उस समय विदेशी निवेश और वैश्विक परिस्थितियों के कारण भारतीय बाजार दबाव में आ गया था। तब आरबीआई ने बाजार में हस्तक्षेप करते हुए कई कदम उठाए थे। माना जाता है कि उन फैसलों ने रुपये को संभालने में अहम भूमिका निभाई थी।
कैसे काम करता है यह फॉर्मूला
जब वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालते हैं तो स्थानीय मुद्रा पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे हालात में केंद्रीय बैंक डॉलर की आपूर्ति बढ़ाकर बाजार को संतुलित करने की कोशिश करता है। साथ ही अन्य वित्तीय उपायों पर भी विचार किया जाता है ताकि निवेशकों का भरोसा बना रहे।
आने वाले दिनों पर नजर
फिलहाल बाजार की नजर आरबीआई के अगले कदम पर टिकी हुई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि वैश्विक हालात लंबे समय तक ऐसे बने रहे तो आर्थिक रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि आरबीआई रुपये को मजबूत करने के लिए कौन सा रास्ता चुनता है।