लखीमपुर खीरी से एक हैरान और गुस्सा दिलाने वाली तस्वीर सामने आई है. दरअसल फारधान थाना क्षेत्र के भादुरा गांव में यूरिया खाद की कमी और कालाबाजारी के खिलाफ किसानों की लंबी लाइनें लग रही थीं. इन्हीं लाइनों में एक किसान उम्मीद के साथ खड़ा था. लेकिन उसे उम्मीद नहीं, पुलिस की लाठी मिली और वो एक बोरी खाद के लिए अपमान, दर्द और मार झेल गया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस किसान पर बेरहमी से लाठी बरसाती नजर आ रही है.
खाद की कालाबाजारी खुलेआम हो रही !
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र की समिति में खाद का कृत्रिम अभाव जानबूझकर दिखाया जा रहा है, ताकि दलालों के जरिए महंगे दामों पर खाद बेची जा सके जबकि असली किसान, जो खेत में अन्न उगाता है, उसे अपमान और हिंसा मिल रही है. स्थानीय लोगों ने बताया कि खाद की कालाबाजारी खुलेआम हो रही है, लेकिन प्रशासन चुप है और पुलिस किसानों को ही खामोश करने पर तुली है. सवाल उठ रहे हैं क्या किसानों के हिस्से में अब सिर्फ लाठी ही बची है? क्या अन्नदाता की आवाज उठाना अब अपराध है?
दो दिन पहले मंत्री ने किया था बड़ा दावा
चौंकाने वाली बात ये है कि दो दिन पहले ही प्रदेश सरकार के एक मंत्री लखीमपुर खीरी के दौरे पर आए थे. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए दावा किया था कि लखीमपुर खीरी में यूरिया की भारी खपत आ चुकी है, जल्द ही किसानों को राहत मिलेगी लेकिन मंत्री जी के बयान और ज़मीनी हकीकत में फर्क अब वीडियो के ज़रिए सामने आ गया है. किसान का कहना है कि हमें खाद नहीं, लाठी दी जा रही है. हालात ऐसे हैं कि किसान अब समिति के गेट पर नहीं, थाने और अस्पताल के सामने लाइन में हैं. लखीमपुर की इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि नीतियों और ज़मीनी क्रियान्वयन में खाई कितनी गहरी है.