
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि तीन कृषि कानूनों में एक मंडी सेक्टर भी था, कानून तो वापसी हो गए, लेकिन धीरे धीरे मंडी के बाहर फसल उत्पादों की खरीद हो रही है। मंडी का इस तरह धीरे धीरे विकास रुक जाएगा। बाहर खरीद होने टैक्स नहीं आए, जिस कारण मंडियां खत्म हो जाएंगी। जैसे बिहार में हुआ। राकेश टिकैत शनिवार को गढ़ रोड स्थित नवीन मंडी परिसर में आयोजित महापंचायत को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार एक रुपये में एक हजार एकड़ जमीन भी बिक्री कर सकती है।
कम दाम पर देश में फसलें खरीदीं गई हैं
सरकार आपकी जमीन हड़पना चाहती है। सरकार की पॉलिसी है की मंडियों को बंद कर दिया जाए। ताकि किसानों को उनकी फसलों का मुनासिब दाम ही नहीं मिल सके। बिहार में भी ऐसा ही कुछ हुआ। अगर हम पिछले 20 साल का आंकड़ा उठाएं तो करीब करीब 45 लाख करोड़ रुपये कम दाम पर देश में फसलें खरीदीं गई हैं। या यू कहें कि इतना किसानों को नुकसान पहुंचाया गया है। एमएसपी गारंटी कानून की जो बात कही, स्वामी नाथन कमेटी की रिपोर्ट की जो बात हुई सीटू प्लस 50 वाले फार्मूले पर बात हुई, इसके हिसाब से देखें तो नुकसान का यह आंकड़ा और भी अधिक जाएगा।
किसानों को नुकसान हो रहा
उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी जमीन नहीं बेचनी है, बल्कि आंदोलन चलाना है। अपनी फसल बेचकर, जो सरकार नई नई पॉलिसी लेकर आ रही है, इस किसानों को नुकसान हो रहा है, हमें इसी विषय पर अपना आंदोलन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान अपने खेत और पशुओं पर काम करें। किसानों ने कौन सा ठेकेदारी ले ली है कि उन्हें ज्यादा फसल उत्पादन करना है। आप अपनी फसल का उत्पादन कम करने की बात दिमाग में रखेंगे तो फर्टिलाइजर की कम जरूरत पड़ेगी। देश में अनाज की यदि कमी होगी तो भाव ठीक मिलेगा। हापुड़ आलू, गन्ने का क्षेत्र है, लेकिन यहां किसान उस फसल की ओर दौड़ पड़ते हैं, जिसका दाम एक साल अच्छा मिल जाता है। हमें यह सोच बदलनी होगी।
देश में बाहर से अनाज खरीद होती थी
अगर पैदावार कम होगी, संगठन मजबूत होगा तो खाद किल्लत करने वाले आपके यहां लाइन लगाकर आएंगे और उत्पादन बढ़ाने को कहेंगे। 2007 से पहले देश में बाहर से अनाज खरीद होती थी। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री की टिकैत साहब से मिटिंग हुई, उस मिटिंग में गेहूं की पैदावार कैसे बढ़े इस पर बात हुई। उस समय की मौजूद सरकार को किसान ने इतना गेहूं पैदा किया कि अब 18 साल बाद भी देश को एक किलो गेहूं खरीद की भी जरूरत नहीं है। अगर सरकार हमसे सवाल पूछेगी, तो हम उन्हें सुझाव जरूर देंगे। लेकिन इससे पैदावार बढ़ेगी। खेत बचाने का अभियान चलाओ, फसल चक्र को अवश्य अपनाओ। अपने बच्चों को खेत नहीं दिखाओगे तो खेत जरूर बिक जाएगा।
उन्होंने कहा कि हमारे आंदोलन कम हो गए हैं, स कारण मिल समय से भुगतान नहीं कर रहे, गन्ने के रेट नहीं बढ़ते, एमएसपी कानून गारंटी के सवाल पर सरकार काम नहीं करेगी, आंदोलन ही एक रास्ता बचा है, इस पर ध्यान दो अपने संगठन पर ध्यान दो।
आई लव मोहम्मद नहीं, आई लव माय फ्लैग के लगाओ बैनर
महापंचायत से पहले राकेश टिकैत ने मीडियाकर्मियों से बातचीत की। प्रदेश भर में चल रहे हैं आई लव मोहम्मद कि सवाल पर उनका कहना था कि यदि किसी को बोर्ड लगाने भी है तो वह आई लव माय फ्लैग के नाम से लगाएं। क्योंकि यह देश सभी का है और तिरंगा इस देश की आन बान शान है।
किसान कार्यकर्ताओं ने किया जोरदार स्वागत
गढ़ रोड स्थित नवीन मंडी में राकेश टिकैत के पहुंचने पर किसान कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। राकेश टिकैत टेक्टर चलाकर महापंचायत कि लिए बनाए गए पंडाल में पहुंचे। उनके पीछे बुलडोजर में सवार युवा उन पर पुष्प वर्षा कर रहे थे। इसके अलावा कार्यकर्ता वाले उनके लिए एक सुरक्षा घेरा भी बना रखा था।
51 मीटर की पगड़ी पहनाकर किया स्वागत
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का युवा किसान कार्यकर्ताओं ने 51 मीटर की पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान युवा किसान कार्यकर्ताओं में जोश देखने लायक था।
सीएचसी के बाहर लगाई बैरिकेडिंग
राकेश टिकैत के महापंचायत में आने की सूचना मिलने पर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। पुलिस ने गढ़ रोड पर स्थित सीएचसी के बाहर बैरिकेडिंग की हुई थी। इसके अलावा मंड़ी के बाहर भारी पुलिस बल मौजूद रहा। इसके अलावा महापंचायत स्थल पर भी पुलिस अलर्ट मोड़ पर रही।
मंच पर बैठने को लेकर हुई बहस
महापंचायत के दौरान जब राकेश टिकैत मंच पर पहुंचे तो कार्यकर्ताओं में उनके पास बैठने को लेकर जद्दोजहद हो गई। इस दौरान महापंचायत के लिए बनाए गए वालंटियर को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके अलाव महापंचायत के मंच से भी कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने की अपील की जा रही थी।
मंडी के व्यापारियों ने भी किया स्वागत
राकेश टिकैत का महापंचायत में पहुंचने पर मंड़ी के व्यापारी संजय गर्ग, जगदीश कुमार, बिट्टू नेता आदि ने माला, शाल व माता की चुनरी पहनाकर स्वागत किया गया।